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पुणे मनपा की लापरवाही के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका; 6 महीने बाद भी नहीं हुआ वृक्ष प्राधिकरण का गठन

Bombay High Court: पुणे मनपा द्वारा वृक्ष प्राधिकरण का गठन न करने पर बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है। शहर में मानक 18% के मुकाबले सिर्फ 10.1% हरित क्षेत्र ही बचा है।

  • Written By: रूपम सिंह
Updated On: Jun 17, 2026 | 08:53 AM

दत्ता बहिरट, नगरसेवक (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)

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Pune Tree Authority Controversy: पुणे शहर में पर्यावरण संरक्षण और वृक्षों के संवर्धन को लेकर पुणे महानगर पालिका की कथित उदासीनता के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नगरसेवक दत्ता बहिरट और सामाजिक कार्यकर्ता पुष्कर कुलकर्णी ने यह याचिका दाखिल करते हुए आरोप लगाया है कि महाराष्ट्र वृक्ष संरक्षण एवं संवर्धन अधिनियम के प्रावधानों का मनपा पालन नहीं कर रही है। अब तक वृक्ष प्राधिकरण का गठन तक नहीं किया गया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सत्या मुले ने न्यायालय में एक याचिका दायर की है।

6 महीने बाद भी फैसला नहीं

दत्ता बहिरट और पुष्कर कुलकर्णी ने बताया कि याचिका में पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ महानगर पालिकाओं को प्रतिवादी बनाया गया है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र वृक्ष संरक्षण एवं संवर्धन अधिनियम के अनुसार प्रत्येक मनपा में वृक्ष प्राधिकरण का गठन अनिवार्य है। निर्वाचित प्रतिनिधियों के अभाव में इसके अधिकार आयुक्त के पास रहते हैं, लेकिन जनवरी 2026 में स्थानीय निकायों में नए जनप्रतिनिधियों के चुने जाने के बाद भी प्राधिकरण का गठन नहीं किया गया।

अधिनियम की भावना के विपरीत कार्य करने के आरोप

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, महापौर, विभिन्न समितियों के पदाधिकारी, पीएमपीएमएल के संचालक तथा शिक्षा समिति के सदस्यों की नियुक्तियां हो चुकी हैं, फिर भी वृक्ष प्राधिकरण के गठन की प्रक्रिया लंबित है। उनका आरोप है कि वर्तमान में आयुक्त ही वृक्ष प्राधिकरण के अधिकारों का उपयोग कर रहे हैं, जो अधिनियम की भावना के विपरीत है। कानून के तहत इस प्राधिकरण में पांच से पंद्रह सदस्य होते हैं और इसमें पर्यावरण तथा वनस्पति क्षेत्र के विशेषज्ञों को शामिल करना आवश्यक होता है।

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जिम्मेदारियों का प्रभावी निर्वहन नहीं

वृक्ष प्राधिकरण की जिम्मेदारियों में पुणे  शहर के वृक्षों का संरक्षण और संवर्धन, प्रत्येक पांच वर्ष में वृक्ष गणना कराना, विभिन्न भूखंडों पर वृक्षों की संख्या और प्रजातियों के मानक तय करना, विकास परियोजनाओं के लिए वृक्ष कटाई की अनुमति देना तथा प्रतिपूरक वृक्षारोपण की निगरानी करना शामिल है। याचिका में दावा किया गया है कि इन जिम्मेदारियों का प्रभावी निर्वहन नहीं हो रहा है। बहिरट ने यह भी आरोप लगाया कि मनपा के स्वामित्व वाले 63,680 फलदार वृक्षों से होने वाली वार्षिक आय का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड प्रशासन के पास नहीं है। उन्होंने कहा कि सामान्य सभा में इस तरह के महत्वपूर्ण विषयों पर भी पर्याप्त चर्चा नहीं होने दी जाती।

यह भी पढ़ें:- मुंबई और मीरा भाईंदर में गहराया जल संकट; निर्माण कार्यों और स्विमिंग पूलों की पानी आपूर्ति पर लगी रोक

पुणे में केवल 10.1 प्रतिशत हिस्सा ही हरित क्षेत्र में

याचिकाकर्ताओं ने घटते हरित क्षेत्र पर भी चिता जताई है। आकड़ों में पुणे के कुल क्षेत्रफल का केवल 10।1 प्रतिशत हिस्सा हरित क्षेत्र के रूप में दर्ज है, जबकि शहरी नियोजन मानकों के अनुसार यह कम से कम 18 प्रतिशत होना चाहिए। लगभग 60 लाख आबादी वाले शहर में केवल 57 लाख वृक्ष है, जबकि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए करीब चार करोड़ वृक्षों की आवश्यकता बताई गई है। समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो शहर का पर्यावरणीय संतुलन और अधिक प्रभावित हो सकता है।

कई बार प्रशासन को ज्ञापन देकर वृक्ष

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी नगरसेवक दत्ता बहिरट ने बताया की प्राधिकरण के गठन की मांग की गई है। इस संबंध में महापौर मंजुषा नागपुरे से भी चर्चा हुई, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इसके बाद न्यायालय का रुख करना पड़ा। याचिका में जनवरी 2026 से आयुक्त द्वारा वृक्ष प्राधिकरण के रूप में लिए गए निर्णयों पर अंतरिम रोक लगाने और तत्काल विधिवत प्राधिकरण गठित करने की मांग की गई है।

Pmc pune tree authority bombay high court petition

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Published On: Jun 17, 2026 | 08:53 AM

Topics:  

  • Bombay High Court
  • Maharashtra News
  • Municipal Corporation
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