पुणे मनपा में दरगाह विवाद पर बवाल, 'हेलमेट आंदोलन' कर विपक्ष ने सत्ताधारी भाजपा के खिलाफ खोला मोर्चा

Pune Helmet Protest: पुणे मनपा में 150 साल पुरानी दरगाह तोड़ने पर हंगामा। विपक्ष ने भाजपा के खिलाफ 'हेलमेट आंदोलन' कर सदन में सुरक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की मांग की।
Uproar in Pune PMC over 150-year-old Dargah demolition. Opposition stages 'Helmet Andolan' against ruling BJP, demanding safety and democratic values in the house.
'हेलमेट आंदोलन' (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Pune Municipal Corporation Dargah Demolition Protest: पुणे महानगर पालिका के सभागार में हाल ही में हुई एक विवादास्पद घटना के बाद शहर का राजनीतिक माहौल पूरी तरह से गर्मा गया है। 'झुंडशाही नहीं, लोकतंत्र चाहिए' जैसे गगनभेदी नारों के साथ विभिन्न विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं ने मनपा मुख्यालय के मुख्य प्रवेशद्वार के सामने तीव्र विरोध प्रदर्शन किया।

इस बड़े आंदोलन में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट), कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार गुट) तथा शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के कार्यकर्ता और नेता आपसी मतभेद भुलाकर एकसाथ नजर आए। आंदोलनकारियों ने सत्ताधारी भाजपा के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए सभागार में हुई घटना की कड़ी निंदा की और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की पुरजोर मांग की।

मनपा सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाने के लगे आरोप

इस राजनीतिक विवाद की शुरूआत बीती 17 जून को आयोजित मनपा की महासभा के दौरान हुई। विपक्ष का आरोप है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस के नगरसेवक गफूर पठाण ने महासभा की कार्यवाही में दापोडी स्थित एक दरगाह को तोड़े जाने ल उठाए जा रह ह। का मुद्दा उठाया था। आरोप है कि प्रश्न उठाते ही सत्ताधारी भाजपा के कुछ नगरसेवक अचानक उग्र होकर उनकी ओर दौड़ पड़े, जिससे सभागार में बेहद तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई और सदन की गरिमा को ठेस पहुंची।

150 वर्ष पुरानी दरगाह तोड़ने का मुद्दा गरमाया

विपक्षी दलों का कहना है कि पुराने पुणे-मुंबई महामार्ग स्थित बोपोडी की लगभग 150 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक हजरत शमसुद्दीन दरगाह को बिना किसी ठोस कारण के अचानक ध्वस्त कर दिया गया। यह दरगाह राज्य सरकार द्वारा 'ए' श्रेणी का दर्जा प्राप्त स्थल थी और इस कार्रवाई से पहले स्थानीय जनप्रतिनिधियों को विश्वास में नहीं लिया गया। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, यह स्थल दशकों से हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक माना जाता था। इस मामले में कुछ जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

विपक्ष का मानना है कि मनपा के इतिहास में हमेशा महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होती रही है, लेकिन इस मामले में सत्ता पक्ष ने तानाशाही रवैया अपनाया। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, पुणे मनपा के लगभग 75 वर्षों के इतिहास में ऐसी अशोभनीय घटना विरले ही देखने को मिली है। महात्मा फुले, बाबा आढाव, भाई वैद्य, भाऊसाहेब शिरोले और वि. भा. पाटील जैसे दिग्गज नेताओं ने इसी सभागार से शहर के विकास के मुद्दे उठाए थे। ऐसे में हालिया घटना को लोकतांत्रिक परंपराओं पर बड़ा आघात माना जा रहा है।

विपक्ष का 'हेलमेट आंदोलन'

विपक्ष ने संबंधित भाजपा नगरसेवकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। इस घटना के विरोध में विपक्ष ने एक अनोखा 'हेलमेट आंदोलन' भी किया। नगरसेवक गफूरभाई पठाण के साथ हुई कथित धक्का-मुक्की के विरोध में कांग्रेस, राकांपा और शिवसेना के नगरसेवक सिर पर हेलमेट पहनकर महापौर मंजुषा नागपुरे के समक्ष पहुंचे। उन्होंने सदन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए अपना विरोध दर्ज कराया और विपक्षी सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।

इस दौरान, नगरसेवक अरविंद शिंदे, प्रशांत जगताप, सोपान उर्फ काका चव्हाण, चंदू कदम और नितीन गावडे सहित अन्य विपक्षी नेताओं ने प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में इस प्रकार का आक्रामक व्यवहार चिताजनक है और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुणे महानगरपालिका की राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और अधिक बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

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