जीबीएस प्रकोप के बाद पुणे के 12 गांवों को मिलेगी शुद्ध पेयजल सुविधा, 890 करोड़ की परियोजना को मिली रफ्तार
Pune Water Project: पुणे मनपा ने जीबीएस प्रकोप के बाद 12 गांवों में शुद्ध पेयजल के लिए ₹890 करोड़ की परियोजना तेज की। ईएसआईए रिपोर्ट तैयार करने के लिए डेलॉयट को सलाहकार नियुक्त किया गया।
- Written By: रूपम सिंह
जलापूर्ति योजना (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Pune Water Project Khadakwasla Dam: गिलियन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) के प्रकोप के बाद पुणे महानगरपालिका सीमा में शामिल 12 गांवों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए प्रस्तावित 890 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी जलापूर्ति परियोजना को गति मिलने जा रही है। परियोजना के लिए आवश्यक पर्यावरण एवं सामाजिक प्रभाव आकलन (ईएसआईए) रिपोर्ट तैयार करने हेतु डेलॉयट टच तोहमात्सू इंडिया एलएलपी को सलाहकार नियुक्त किया गया है। इस कार्य के लिए 36.32 लाख रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है, जिसकी जानकारी स्थायी समिति के अध्यक्ष श्रीनाथ भिमाले ने दी।
जनवरी 2025 में जीबीएस के मामले आए थे
मनपा में शामिल 32 गांवों में से नांदेड, किरकटवाड़ी, नांदोशी, नर्व्हे, सनसनगर, खडकवासला, धायरी, जांभुलवाड़ी, गुजर निंबालकरवाड़ी और भिलारेवाड़ी में जनवरी 2025 के दौरान जीबीएस के मामले सामने आए थे।
विशेषज्ञों ने दूषित जलापूर्ति को इस बीमारी के संभावित कारणों में से एक माना था। वर्तमान में इन गांवों को प्रतिदिन लगभग 47.50 एमएलडी क्लोरीनयुक्त लेकिन बिना शुद्ध किया गया पानी उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि पीने के लिए अलग से 2.49 एमएलडी शुद्ध पानी टैंकरों के माध्यम से पहुंचाया जाता है। इस संकटपूर्ण स्थिति को देखते हुए इन गांवों के लिए स्वतंत्र व आधुनिक शुद्ध जलापूर्ति योजना तैयार की गई है।
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पंपिंग स्टेशन का होगा निर्माण
प्राइमूव इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कसल्टेंट्स प्रा.लि. द्वारा तैयार विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के अनुसार इस पूरी योजना की अनुमानित लागत 890 करोड़ रुपये है। इस बड़े प्रोजेक्ट के तहत खडकवासला डैम से पानी लेने के लिए जैकवेल और पंपिंग स्टेशन का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही 100-100 एमएलडी क्षमता के दो बड़े वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, मुख्य पाइपलाइन एवं वितरण नेटवर्क, जल भंडारण टंकियां तथा अत्याधुनिक एससीएडीए ऑटोमेशन प्रणाली विकसित की जाएगी।
परियोजना के वित्त पोषण के लिए पुणे महानगरपालिका की इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन के साथ चर्चा अंतिम चरणों में जारी है। आईएफसी ने प्रारंभिक स्तर पर वित्त उपलब्ध कराने की सहमति जताई है, जिसके लिए ईएसआईए रिपोर्ट जमा करना अनिवार्य होगा, प्रशासन के अनुसार, इस रिपोर्ट पर होने वाला खर्च भी आईएफसी के एमयूडब्ल्यूआरईपी कार्यक्रम के तहत वापस प्राप्त हो जाएगा।
