

सिन्नर थर्मल पावर लिमिटेड ने मनपा के शोधित सीवेज के उपयोग में रुचि दिखाई।
परियोजना की तकनीकी और व्यावसायिक व्यवहार्यता का होगा आकलन।
मनपा से सात प्रमुख बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी मांगी गई।
पानी की गुणवत्ता, नियमित आपूर्ति, पाइपलाइन और लागत का होगा परीक्षण।
संयुक्त समिति निरीक्षण के बाद तकनीकी एवं व्यावसायिक रिपोर्ट तैयार करेगी।
Nashik Mahagenco-NTPC Joint Venture Wastewater Supply: सिन्नर थर्मल पावर लिमिटेड (STPL) ने नासिक महानगरपालिका के शोधित सीवेज का औद्योगिक उपयोग करने में रुचि दिखाई है। कंपनी ने परियोजना की व्यवहार्यता जांचने के लिए मनपा से पानी की उपलब्धता, गुणवत्ता, पाइपलाइन, आपूर्ति व्यवस्था, लागत और कानूनी अनुमतियों सहित सात बिंदुओं पर विस्तृत प्रस्ताव मांगा है।
नासिक शहर,औद्योगिक उपयोग के लिए मीठे पानी पर निर्भरता कम करने की दिशा में नासिक महानगरपालिका की पहल को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। महाजेनको और एनटीपीसी के संयुक्त उपक्रम सिन्नर थर्मल पावर लिमिटेड (एसटीपीएल) ने मनपा के शोधित सीवेज यानी उपचारित गंदे पानी का औद्योगिक उपयोग करने में रुचि दिखाई है। कंपनी ने इस परियोजना की तकनीकी और व्यावसायिक व्यवहार्यता का आकलन करने का निर्णय लिया है। इसके लिए मनपा प्रशासन से सात प्रमुख बिंदुओं पर विस्तृत प्रस्ताव मांगा गया है।
इस पहल का उद्देश्य मीठे पानी की खपत कम करना और उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करना है। यदि परियोजना आगे बढ़ती है, तो थर्मल प्लांट में औद्योगिक जरूरतों के लिए शोधित सीवेज का इस्तेमाल किया जा सकेगा।
प्रारंभिक मूल्यांकन के लिए एसटीपीएल ने मनपा से प्रत्येक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के अनुसार उपलब्ध शोधित पानी की मात्रा का विवरण मांगा है। इसमें पानी की नियमित उपलब्धता, मौसमी बदलाव और भविष्य में आपूर्ति बढ़ाने की संभावनाओं की जानकारी शामिल है।
इसके साथ ही पानी की गुणवत्ता से संबंधित नवीनतम प्रयोगशाला रिपोर्ट और नियमित गुणवत्ता जांच की व्यवस्था का विवरण भी मांगा गया है। औद्योगिक उपयोग के लिए पानी निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरता है या नहीं, इसका परीक्षण परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
कंपनी ने प्रस्तावित परियोजना के तहत पानी पहुंचाने के स्थान, पाइपलाइन के संभावित मार्ग, पंपिंग और भंडारण व्यवस्था तथा पानी की मात्रा मापने की प्रणाली की जानकारी मांगी है।
नियमित आपूर्ति के साथ आपातकालीन व्यवस्था, नियोजित शटडाउन और किसी कारण से सेवा बाधित होने की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी, इस पर भी मनपा से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
परियोजना की अनुमानित पूंजीगत और परिचालन लागत, खर्च का बंटवारा, पानी की दर तय करने की पद्धति और भविष्य में दरों में संभावित वृद्धि से संबंधित जानकारी भी मांगी गई है।
इसके अलावा आवश्यक कानूनी अनुमतियां, परियोजना लागू करने का समयबद्ध कार्यक्रम तथा इसके स्वामित्व और रखरखाव की संस्थागत व्यवस्था का विवरण देने को कहा गया है।
मनपा से विस्तृत जानकारी मिलने के बाद दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों की एक बहुविषयक संयुक्त समिति गठित की जाएगी। समिति प्रारंभिक चर्चा के बाद प्रस्तावित जल स्रोतों का निरीक्षण करेगी। साथ ही पानी की गुणवत्ता और अन्य तकनीकी शर्तों की जांच कर संयुक्त तकनीकी एवं व्यावसायिक व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करेगी।
शोधित सीवेज का औद्योगिक उपयोग शुरू होने से भविष्य में मीठे पानी के संसाधनों पर दबाव कम हो सकता है। इससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिलने के साथ पर्यावरण अनुकूल जल प्रबंधन की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकेगा। हालांकि, परियोजना का वास्तविक स्वरूप संयुक्त समिति की जांच और व्यवहार्यता रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा।