प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: AI)
Ramkrishna More Auditorium News: पिंपरी-चिंचवड़ महानगर पालिका के अंतर्गत चिंचवड़ स्थित प्रा. रामकृष्ण मोरे प्रेक्षागृह के किराए और जमानत राशि में 50 लाख 6 हजार 626 रुपये के गबन का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस गंभीर भ्रष्टाचार को चिंचवड़ के विधायक शंकर जगताप ने विधानसभा के बजट सत्र में तारांकित प्रश्न के माध्यम से उठाया और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। विधायक जगताप ने कहा कि जनता के पैसे पर डाका डालने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए।
‘कारण बताओ नोटिस’ जारी इस मामले पर संज्ञान लेते हुए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सदन को सूचित किया कि खेल विभाग के प्रशासनिक अधिकारी सहित 11 कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। जांच के आधार पर प्रेक्षागृह के एक लिपिक, मुख्य लिपिक और प्रभारी प्रबंधक की जिम्मेदारी तय की गई है।
वर्तमान में एक लिपिक को निलंबित कर उसके विरुद्ध विभागीय जांच शुरू है। साथ ही, संबंधित कर्मचारियों के अर्जित अवकाश के नकदीकरण और अन्य आर्थिक लाभों के भुगतान पर भी रोक लगा दी गई है। ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है।
छह वर्षों तक चलता रहा राजस्व की लूट का खेल ऑडिट रिपोर्ट के चौंकाने वाले तथ्यों के अनुसार, भ्रष्टाचार का यह खेल वर्ष 2018-19 से लेकर 2023-24 तक निरंतर चलता रहा। विधायक जगताप ने सदन को बताया कि प्रेक्षागृह से प्राप्त होने वाली आय को पिंपरी-चिंचवड़ महानगर पालिका के कोष में जमा करने के बजाय संबंधित अधिकारियों ने निजी स्वार्थ के लिए उपयोग किया।
शुरुआत में गबन की राशि 20 लाख रुपये होने का अनुमान था, लेकिन विस्तृत ऑडिट के बाद यह आंकड़ा व्याज सहित बढ़कर 42 लाख 68 हजार 195 रुपये तक पहुंच गया। इसके अतिरिक्त, 8 लाख 3 हजार 411 रुपये की जमानत राशि के रिकॉर्ड में भी भारी अनियमितता पाई गई है। आश्चर्य की बात यह भी है कि प्रशासन की नाक के नीचे छह वर्षों तक राजस्व की लूट होती रही और किसी को भनक तक नहीं लगी।
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उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सदन को आश्वस्त किया कि रसीदों और किराया वसूली के लेन-देन में पाई गई त्रुटियों के लिए जवाबदेही तय कर दी गई है। एक लिपिक के निलंबन के साथ ही प्रभारी प्रबंधक और मुख्य लिपिक की भूमिका की गहनता से जांच की जा रही है। एहतियाती कदम उठाते हुए दोषी कर्मचारियों के वित्तीय लाभों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। सभी 11 संबंधित कर्मचारियों को नोटिस जारी किया जा चुका है और प्रशासन अब इस गबन की पाई-पाई वसूलने के लिए विधिक कदम उठा रहा है।
विधायक शंकर जगताप ने कहा कि निचले स्तर के लिपिकों को बलि का बकरा बनाकर इस मामले को दबाया न जाए। उच्चाधिकारियों की मिलीभगत या लापरवाही के बिना इतने बड़े स्तर पर वित्तीय धोखाधड़ी संभव नहीं है। जगताप ने उपमुख्यमंत्री से आग्रह किया कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर प्रमुख दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और गबन की गई संपूर्ण राशि ब्याज सहित वसूली जाए।