पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका (सोर्स: सोशल मीडिया)
PCMC Missing Records Audit Irregularities Case: पिंपरी-चिंचवड़ महानगर पालिका (पीसीएमसी) में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है।
मनपा प्रशासन द्वारा कराए गए आंतरिक और विशेष ऑडिट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि कुल 6,257 करोड़ रुपये के वित्तीय रिकॉर्ड और फाइलें गायब हैं।
ऑडिट विभाग को जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने में की जा रही टालमटोल के कारण अब हजारों करोड़ रुपये के कामों में बड़े पैमाने पर अनियमितता और घोटाले की आशंका जताई जा रही है।
रिकॉर्ड की अनुपलब्धता के कारण ऑडिट की प्रक्रिया पूरी तरह बाधित हो गई है। इसका सीधा असर निर्माण अनुमति, कर वसूली, उद्यान विभाग, अग्निशमन, नगररचना, सार्वजनिक स्वास्थ्य और लेखा विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभागों के कामकाज पर पड़ा है। इन विभागों द्वारा किए गए खर्च, वसुली और आपत्तियों का विवरण स्पष्ट नहीं हो पा रहा है, जिससे जांच अधूरी रह गई है।
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2012-13 से मार्च 2024 तक के निरीक्षण में करीब 1,915 करोड़ रुपये की आपत्तियां और 2,131 करोड़ रुपये की लंबित वसूली दर्ज है। इसके अलावा, 2,123 करोड़ करोड़ रुपये से अधिक का रिकॉर्ड न मिलने के कारण कुल विवादित राशि 6, 123 करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है।
ऑडिट में उठी आपत्तियों पर संबंधित विभागों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए है। कुछ मामलों में रिकॉर्ड न मिलने के कारण ऑडिट लंबित है और रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
– प्रमोद भोसले, मुख्य लेखा परीक्षक, पिचिं मनपा
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इस स्थिति ने प्रशासन की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों का आरोप है कि जानबूझकर फाइलों को गायब किया गया है ताकि भ्रष्टाचार पर पर्दा डाला जा सके। इस मामले में चेतावनी दी गई है कि यदि दो महीने के भीतर रिकॉर्ड पेश कर उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो इस वित्तीय गबन के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की जाएगी। सामाजिक कार्यकर्ता मारुति भापकर ने भी इसे शहर के इतिहास का बड़ा घोटाला करार देते हुए गहन जांच की मांग की है।