पवना बांध क्षेत्र में माफिया का दिनदहाड़े अवैध उत्खनन, 30 फीट गहरे गड्ढे किए; मकोका लगाने की मांग

Pimpri Pavana Dam: पवना बांध का जलस्तर 32% गिरने पर भू-माफियाओं ने अवैध उत्खनन तेज कर दिया है। सामाजिक कार्यकर्ता युवराज निघोट ने आरोपियों पर मकोका लगाने और ड्रोन सर्वे की मांग की है।
As Pavana dam's water level drops to 32%, illegal sand and soil mining mafia intensifies operations. Activists demand MCOCA and drone surveys against violators.
अवैध उत्खनन (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
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Pimpri Pavana Dam Illegal Mining News: पिंपरी मावल तहसील की जीवनदायिनी कहे जाने वाले पवना बांध क्षेत्र से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। भीषण गर्मी के कारण बांध का जलस्तर घटकर महज 32 प्रतिशत रह गया है। इसी का फायदा उठाकर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध मुरूम और मिट्टी उत्खनन की गतिविधियां भी दिनदहाड़े शुरू हो गई हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जलसंपदा विभाग, सिंचन विभाग और तहसील प्रशासन इस गंभीर मामले पर जानबूझकर आंखें मूंदे बैठा है।

कमजोर हो जाएगी बांध की मूल संरचना पर्यावरण प्रेमियों ने सचेत किया है कि इस अंधाधुंध उत्खनन से पर्यावरण कानून का सरेआम उल्लंघन हो रहा है, जिससे बांध की मूल संरचना कमजोर हो सकती है। स्थानीय नागरिकों ने बांध क्षेत्र के पांच किलोमीटर के दायरे को तत्काल 'नो माइनिंग जोन' घोषित करने, मुख्यमंत्री द्वारा विशेष गश्ती दल तैनात करने और ड्रोन सर्वे के जरिए माफिया से नुकसान की वसूली करने की मांग की है।

पर्यावरणीय डकैती के खिलाफ मोर्चा खोला

नदी क्षेत्र में 30 फीट गहरे गड्ढे खोदे गए बांध का पानी पीछे हटने से विस्तृत क्षेत्र में बड़ी मात्रा में समतल मिट्टी और मुरूम उपलब्ध हो गया है। माफिया ने पेठेवाड़ी और लांबवडे क्षेत्रों को अपना मुख्य निशाना बनाया है, जहां जेसीबी और पोकलेन मशीनों के जरिए 20 से 30 फीट गहरे गड्ढे खोद दिए गए हैं। यहां से बिना नंबर प्लेट वाले सैकड़ों हायवा ट्रक और डंपर बाभली, कुसगांव, केशेवली, शिल्ली और मुझे गांवों के रास्तों से अवैध रूप से मुरूम का परिवहन कर रहे हैं। इस संगठित लूट के पीछे स्थानीय राजस्व अधिकारियों की अर्थपूर्ण मिलीभगत का संदेह जताया जा रहा है।

कमजोर हो जाएगी बांध की मूल संरचना

पर्यावरण प्रेमियों ने सचेत किया है कि इस अंधाधुंध उत्खनन से पर्यावरण कानून का सरेआम उल्लंघन हो रहा है, जिससे बांध की मूल संरचना कमजोर हो सकती है। स्थानीय नागरिकों ने बांध क्षेत्र के पांच किलोमीटर के दायरे को तत्काल 'नो माइनिंग जोन' घोषित करने, मुख्यमंत्री द्वारा विशेष गश्ती दल तैनात करने और ड्रोन सर्वे के जरिए माफिया से नुकसान की वसूली करने की मांग की है।

पर्यावरणीय डकैती के खिलाफ मोर्चा खोला

सामाजिक कार्यकर्ता युवराज निघोट ने इस पर्यावरणीय डकैती के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए मुख्यमंत्री और राजस्व विभाग को लिखित शिकायत भेजी है। उन्होंने मांग की है कि विरोध करने वाले किसानों को डराने-धमकाने वाले इस संगठित गिरोह, डंपर मालिकों और जेसीबी चालकों पर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) के तहत सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं हुई, तो किसान और व्यापारी संघ मंत्रालय के सामने तीव्र धरना आंदोलन करेंगे।

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