पुणे के 23 गांवों की बदलेगी तस्वीर: पानी-सीवेज परियोजना के लिए ₹2 हजार करोड़ की मेगा योजना तैयार
Pune Development Project: पुणे मनपा में शामिल 23 गांवों के विकास के लिए 2 हजार करोड़ की योजना तैयार की गई है। पेयजल और सीवेज समस्या दूर करने के लिए विश्व बैंक से भी फंड लिया जाएगा।
- Written By: अंकिता पटेल
पुणे पेयजल और सीवेज,(सोर्स: सोशल मीडिया)
Pune Water Supply Scheme: पुणे महानगरपालिका की सीमा में शामिल किए गए 23 गांवों को तस्वीर बदलने के लिए प्रशासन ने एक बड़ी विकास योजना को अंतिम रूप दिया है। बुनियादी ढांचे की कमी से जूझ रहे इन क्षेत्रों में पेयजल और सीवेज की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए 2 हजार करोड़ रुपये का विशाल बजट तैयार किया गया है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की सबसे खास बात इसकी फंडिंग रणनीति है, जिसके तहत केंद्र और राज्य सरकार से 500-500 करोड़ रुपये का योगदान मिलेगा, जबकि शेष एक हजार करोड़ रुपये विश्व बैंक से कर्ज के रूप में जुटाए जाएंगे। मनपा आयुक्त नवल किशोर राम ने स्पष्ट किया है कि इस योजना का लक्ष्य केवल कागजी विकास नहीं, बल्कि अगले 2 वर्षों के भीतर जमीनी स्तर पर बदलाव लाना है।
विकास के लिए मनपा लेगी कर्ज
महानगरपालिका प्रशासन ने शामिल 23 गांवों में नागरिक सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए कमर कस ली है। आयुक्त ने जानकारी दी कि इन परियोजनाओं के लिए बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं, लेकिन कार्यों की व्यापकता को देखते हुए अतिरिक्त फंड की आवश्यकता थी। इसी कड़ी में आने वाले कुछ दिनों में विश्व बैंक और सरकारों के प्रतिनिधियों के सामने विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट पेश की जाएगी,
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7 अधूरी जलापूर्ति परियोजनाएं की जाएंगी पूरी
इस योजना का एक बढ़ा हिस्सा जल प्रबंधन पर केंद्रित है। आंकड़ों के अनुसार शामिल गावों में शामिल 12 ऐसे क्षेत्र हैं, जहां वर्तमान में दूषित जलापूर्ति एक बड़ी समस्या बनी हुई है, जिसे प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाएगा, इसके अलावा, 13 अन्य गांवों में पूरी तरह से नया पाइयलाइन नेटवर्क बिछाया जाएगा, ताकि हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंच सके वर्तमान में चल रही 7 अधूरी जलापूर्ति परियोजनाओं को भी इसी फड़ के जरिए समय पर पूरा किया जाएगा, सीवेज सिस्टम को मजबूत करने के लिए प्रशासन दो स्थानों पर अत्याधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) स्थापित करेगा, जिससे गंदे पानी का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण संभव हो सकेमा और पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलेगा।
2 साल की समय सीमा तय
प्रशासन की योजना अगस्त 2026 से इन कार्यों को चरातल पर शुरू करने की है। पिछले कई सालों से लंबित इन समस्याओं को दूर करने के लिए 2 साल की कड़ी समय सीमा तय की गई है, ताकि विस्तारित पुणे के नागरिकों को शहर के मुख्य हिस्सों की तरह ही मूलभूत सुविधाएं मिल सकें, इस योजना का एक बड़ा हिस्सा जल प्रबंधन पर केंद्रित है। आंकड़ों के अनुसार शामिल गांधी में शामिल 12 ऐसे क्षेत्र है, जहां वर्तमान में दूषित जलापूर्ति एक बड़ी समस्या बनी हुई है।
गांवों के जलजमाव वाले 366 स्थानों की पहचान
जलभराव की समस्या केवल पुराने शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि उपनगरों में भी यह एक बड़ी चुनौती है। प्रशासन ने पूरे पुर्ण क्षेत्र में 366 ऐसे संवेदनाशील स्थानों की पहचान की है जहां मानसून के दौरान जलजमाव होता है। इन क्षेत्रों में ड्रेनेज लाइन और वर्षा जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए लगभग 400 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।
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इस मद के लिए फंड जुटाने हेतु प्रशासन ‘ब्लू बॉन्ड’ जारी करने जैसे आधुनिक वित्तीय विकत्यों पर भी विचार कर रहा है। आयुक्त ने संकेत दिए है कि अगले सप्ताह होने वाली बैठक में वित्तीय संसाधनों के उपयोग और जमा राशि के निदेश पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा, भूमिगत सड़कों का बिछेगा जाल बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ शहर की यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए प्रशासन ने ‘पाताल लोक’ नामक टनल नेटवर्क की एक क्रांतिकारी योजना पेश की है। लगभग 34 हजार करोड़ रुपये की इस महा-परियोजना के तहत शहर में 54 किलोमीटर लंबा भूमिगत सड़कों का जाल बिछाया जाएगा।
