Water Crisis: हाडशी में पानी की बूंद-बूंद के लिए संघर्ष, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

Pune Water Crisis: पुणे की मुलशी तहसील के हाडशी गांव में सिंचाई विभाग के कुप्रबंधन के कारण तालाब का पानी खत्म। 160 परिवारों के सामने बूंद-बूंद पानी का संकट, ग्रामीणों में आक्रोश।
Severe water crisis hits Hadshi village in Pune as dam water hits dead storage. Villagers blame the Irrigation Department's poor planning and threaten protest.
भीषण जल संकट (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Pune Hadshi Village Water Management Issue: पुणे जिले की मुलशी तहसील के हाडशी गांव में पिछले एक महीने से भीषण जल संकट बना हुआ है। गांव की इस गंभीर स्थिति ने स्थानीय प्रशासन और सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेष बात यह है कि गांव की सीमा के भीतर ही सिंचाई विभाग का एक बड़ा तालाब मौजूद है, लेकिन पानी छोड़ने और उसके वितरण का सही नियोजन न होने के कारण पूरा गांव बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहा है।

सिंचाई विभाग की घोर लापरवाही के कारण हाडशी जलाशय का पानी पूरी तरह समाप्त हो चुका है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग ने वळकी नदी में छोड़े जाने वाले पानी का कोई ठोस शेड्यूल तय नहीं किया था। बिना किसी उचित नियोजन के तालाब का पानी लगातार बहाए जाने से स्थिति इतनी बदतर हो गई है कि जलस्तर 'डेड स्टोरेज' के भी नीचे चला गया है। इसका सीधा खामियाजा हाडशी गांव के नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।

जनप्रतिनिधियों ने की कार्रवाई करने की मांग

वर्तमान में गांव के करीब 160 परिवारों के लगभग 900 लोगों को भीषण गर्मी में पीने के पानी के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। महिलाओं और बच्चों को लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। इस संवेदनशील समस्या पर जब सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता किशोर चव्हाण से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कॉल रिसीव न कर श्थोड़ी देर में फोन करता हूंर का मैसेज भेजकर पल्ला झाड़ लिया।

वहीं, विभाग के कर्मचारी पाटारी कोंढरे ने ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का फोन उठाना तक मुनासिब नहीं समझा। अधिकारियों के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये के खिलाफ ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने तुरंत टैंकरों या वैकल्पिक मार्ग से सुचारू जलापूर्ति शुरू नहीं की, तो वे तीव्र जनआंदोलन करेंगे।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी गांव का दौरा कर स्थिति को चिंताजनक बताया है। उन्होंने पुणे सरकार से मांग की है कि पानी की बर्बादी करने वाले और नियोजन में विफल रहने वाले संबंधित अधिकारियों के खिलाफ तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

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