

Pimpri Chinchwad Municipal Corporation Financial Crisis : पिंपरी, (सं।) लगभग साढ़े 4 हजार करोड़ के भारी कर्ज में डूबी पिंपरी-चिंचवड़ मनपा में जनता के खून-पसीने की कमाई पर वीआईपी ऐश-ओ-आराम का खुला खेल चल रहा है। एक तरफ वित्तीय संकट का रोना रोकर विकास कार्य रोके जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ सरकारी नियमों को ठेंगा दिखाकर अफसरों और नेताओं के लिए तय सीमा से अधिक कीमत की चमचमाती गाड़ियां खरीदी जा रही हैं।
दिलचस्प बात यह भी है कि शहरवासियों को फिजूलखर्ची रोकने का ज्ञान बांटने वाले मनपा आयुक्त ने खुद अपने ही आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए अपने लिए आलीशान गाड़ी खरीदने की फाइल पास कर दी है। जनता को बुनियादी सुविधाएं देने का दावा करने वाले महापौर की आलीशान सवारी के लिए प्रशासन ने सरकारी तिजोरी का दिल खोलकर इस्तेमाल किया है।
राज्य सरकार के नियमानुसार 'ए', 'बी' और 'सी' ग्रेड की महानगर पालिकाओं के महापौर के लिए वाहन खरीदने की अधिकतम खर्च सीमा 20 लाख रुपये तय की गई है, जिसके लिए जुलाई 2020 में शासनादेश जारी हुआ था। इसी तरह, 17 सितंबर 2025 के आदेशानुसार मनपा आयुक्त के लिए गाड़ी खरीदने की वित्तीय सीमा 15 लाख रुपये निर्धारित है। लेकिन इन दोनों सरकारी आदेशों को ताक पर रखकर प्रशासन ने महापौर के लिए सीधे 30 लाख रुपये का आलीशान वाहन खरीदा, जो तय सीमा से पूरे 10 लाख रुपये अधिक है। वहीं, मनपा आयुक्त के लिए भी नियमों का उल्लंघन कर 19 लाख की गाड़ी खरीदी गई।
यह पूरी वीआईपी खरीदारी ऐसे समय में की गई है जब पिंपरी-चिंचवड मनपा की वित्तीय स्थिति बेहद नाजुक दौर से गुजर रही है। वर्तमान में मनपा पर लगभग 4 हजार 500 करोड़ रुपये की भारी-भरकम देनदारियां (लायबिलिटी) बकाया हैं।
हालत यह है कि पिंपरी शहर की बुनियादी और बड़ी विकास परियोजनाओं दैनिक खर्चों को पूरा करने के लिए प्रशासन को नया कर्ज लेने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। इस गहरे आर्थिक संकट के बीच, जब मनपा के पास पहले से मौजूद प्रशासनिक वाहन पूरी तरह से अच्छी स्थिति में हैं, तब इतनी महंगी नई गाड़ियों की खरीद हैरान करती है।