मुंबई-पुणे मिसिंग लिंक परियोजना पर उठे सवाल, उद्घाटन के दो महीने बाद ही सड़क पर उभरे गड्ढे, विपक्ष ने घेरा
Mumbai Pune Expressway: मुंबई-पुणे मिसिंग लिंक परियोजना के उद्घाटन के दो महीने बाद ही सड़क पर गड्ढे उभरने लगे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता गोपाल तिवारी ने निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
- Written By: रूपम सिंह
मुंबई-पुणे मिसिंग लिंक परियोजना (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
Mumbai Pune Missing Link: करोड़ों रुपये की लागत से तैयार मुंबई-पुणे मिसिंग लिंक परियोजना एक बार फिर चर्चा में है। 1 मई 2026 को उद्घाटन के लगभग दो महीने बाद ही परियोजना के कुछ हिस्सों में गड्ढे उभरने लगे हैं। इससे सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय नागरिकों और वाहन चालकों ने सोशल मीडिया पर सड़क की तस्वीरें और वीडियो साझा कर नाराजगी जताई है।
सोशल मीडिया पर सामने आईं तस्वीरें
स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी महत्वपूर्ण और महंगी परियोजना में शुरुआती बारिश के बाद ही सड़क का क्षतिग्रस्त होना गंभीर चिंता का विषय है। उनका कहना है कि यदि शुरुआत में ही सड़क की यह स्थिति है तो भविष्य में इसकी गुणवत्ता और टिकाऊपन पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। नागरिकों ने पूरे मामले की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
मामले को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस प्रवक्ता गोपाल तिवारी ने आरोप लगाया कि महायुति सरकार के कार्यकाल में पारदर्शिता और गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि मुंबई की एक अन्य परियोजना में टेंडर प्रक्रिया पर न्यायालय की टिप्पणी के बाद अब मुंबई-पुणे मिसिंग लिंक परियोजना में शुरुआती बारिश के साथ सड़क पर गड्ढे दिखाई देना भी गंभीर मामला है।
सम्बंधित ख़बरें
राजस्व प्रशासन में 12 साल बाद बड़ा बदलाव: चंद्रशेखर बावनकुले ने अधिकारियों की जिम्मेदारियों का किया पुनर्गठन
मुंबई-पुणे मिसिंग लिंक पर उद्घाटन के 2 महीने बाद हो गए गड्ढे, वीडियो आया सामने, जानें क्या बोले CM फडणवीस
नागपुर बनेगा BRICS का मेजबान, 11 देशों के मंत्री और अधिकारी 9 जुलाई से जुटेंगे; सम्मेलन के लिए तैयारियां पूरी
पुणे में 55 लाख आबादी की पेयजल जरूरतों की तैयारी, 1015 करोड़ की पवना जलवाहिनी परियोजना को मिलेगी रफ्तार
गुणवत्ता जांच की उठी मांग
विपक्ष और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि परियोजना इतनी जल्दी प्रभावित हो रही है तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उनका मानना है कि सार्वजनिक धन से बनने वाली परियोजनाओं में गुणवत्ता मानकों से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
यह भी पढ़ें:- पुणे के डैमों में बढ़ा पानी लेकिन कटौती जारी, मनपा की शर्त- 85% भरने पर ही मिलेगी राहत, पालकी उत्सव में छूट
आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल संबंधित निर्माण एजेंसी या सरकारी विभाग की ओर से सड़क पर बने गड्ढों और गुणवत्ता संबंधी आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि जांच होती है या नहीं और यदि होती है तो उसके निष्कर्ष क्या सामने आते हैं।
