महाविकास आघाड़ी और महायुति के उम्मीदवारों के लिए संकट, भाजपा की रणनीति ने सबको हैरान किया
Pune Municipal Corporation के मसौदा वार्ड संरचना के कारण सत्ताधारी महायुति और महाविकास आघाड़ी दोनों के लिए ही मुश्किल खड़ी हो गई है। वार्ड संरचना ने भाजपा और महाविकास आघाड़ी की मुसीबतें बढ़ा दी।
- Written By: अपूर्वा नायक
पुणे महानगरपालिका (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Pune News In Hindi: पुणे मनपा के मसौदा वार्ड संरचना से सत्तारूढ़ महायुत्ति और महाविकास आघाड़ी दोनों के उम्मीदवारों के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि मसौदा तैयार करते समय भारतीय जनता पार्टी के कुछ स्थानीय वरिष्ठ नेताओं ने ऐसी रणनीति बनाई है जिससे न केवल महाविकास आघाड़ी और महायुति के उम्मीदवारों बल्कि भाजपा के अपने कुछ उम्मीदवारों को भी घर का रास्ता दिखा दिया गया है।
इस स्थिति ने महाविकास अघाड़ी और महायुति के उम्मीदवारों को असहाय कर दिया है, जबकि भाजपा के उम्मीदवारों को समझ नहीं आ रहा है कि वे अपनी शिकायत किससे करें।
मतदाताओं को खोने का डर
इस मुद्दे पर खुलकर बात करने से संभावित उम्मीदवारी खतरे में पड़ सकती है जबकि चुप रहने से मतदाताओं को खोने का डर है। इसी वजह से भाजपा के उम्मीदवार इस समय कुष्पी साधे हुए हैं, लेकिन वे खुले तौर पर इस अन्याय के खिलाफ नहीं बोल सकते इसलिए कुछ भाजपा उम्मीदवारों ने अपने विश्वसनीय लोगों के जरिए आपनियां दर्ज कराई है। इसी वजह से पुणे में आर्थतियों की बाद आ गई है। ये उम्मीदवार अब सुनवाई और संभावित बदलावों का बेसदी से इतजार कर रहे है। पुणे मनपा की मसौदा वार्ड संरचना में अधिकांश वार्डों को तोड़ दिया गया है। ऐसी चर्चा है कि भाजपा के कुछ स्थानीय वरिष्ठ नेताओं ने मानविकार अधाड़ी के उन वाडाँ को तोड़कर भाजन बहुल क्षेत्रों में जोड़ा है वहां उन्हें सफलता मिलने की संभावना थी।
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किससे करें शिकायत ?
भाजपा के स्थानीय नेताओं ने न केवल विपक्षी दलों को बल्कि अपनी ही पार्टी के कुछ उम्मीदवारों को भी इस मसौदा संरचना से आहर करने की रणनीति बनाई है। ऐसी अटकलें हैं कि मसौदा तैयार करते समय संभावित उम्मीदवारों का अनुमान लगाया गया और उसी के अनुसार वार्डों की संरचना की गई। वाहीं, कुछ लोगों को तो उम्मीदवारी का वादा भी किया गया है। अब भाजपा के भीतर इस बात पर चर्चा हो रही है कि किन उम्मीदवारों को वादा किया गया है और उसी के आधार पर वाडों की संरचना कैसे की गई होगी। यह भी अफवाह है कि भाजपा के कुछ स्थानीय नेताओं ने कार्यकाल पूरा कर चुके मौजूदा नगरसेवकों की उम्मीदवारी को भी खतरे में डाल दिया है। इन नगरसेवकों को समझ नहीं आ रहा है कि ये अपनी शिकायत किससे करें।
