अब तेंदुए से बचाएगा AI, महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, हमलों पर काबू पाने ड्रोन से होगी निगरानी

Maharashtra Leopard Attacks Control: महाराष्ट्र में बढ़ते तेंदुआ हमलों के बीच सरकार ने पुणे, नासिक व अहिल्यानगर में एआई चेतावनी सिस्टम, 1000 अतिरिक्त पिंजरे, ड्रोन निगरानी व्यवस्था को मंजूरी दी है।
Leopard Attack
तेंदुआ (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Maharashtra Leopard Attacks AI Warning System: महाराष्ट्र में तेंदुए के लगातार बढ़ते हमलों को देखते हुए राज्य सरकार ने एहतियाती कदम तेज कर दिए हैं। वन मंत्री गणेश नाईक ने सोमवार को बताया कि पुणे, अहिल्यानगर और नासिक जिलों में AI आधारित चेतावनी प्रणाली, अतिरिक्त पिंजरे और ड्रोन निगरानी का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि तेंदुओं के हमलों को रोका जा सके और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

एआई सिस्टम और ड्रोन से निगरानी मजबूत

मंत्री नाईक ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में एक किलोमीटर के अंतराल पर एआई-आधारित चेतावनी उपकरण लगाए गए हैं। यह सिस्टम किसी भी गांव में तेंदुए के प्रवेश करते ही तुरंत अलर्ट जारी कर देता है। इसके अलावा ड्रोन की मदद से जंगलों और गांवों के आसपास की गतिविधियों की लगातार निगरानी की जा रही है।

जुन्नार में 1,000 पिंजरे, स्वयंसेवकों की मदद

पिछले एक महीने में जुन्नार वन प्रभाग के शिरूर तहसील में तेंदुओं के हमलों में तीन लोगों की मौत हो चुकी है। घटनाओं से नाराज स्थानीय लोगों ने हाल ही में वन विभाग के एक वाहन को आग भी लगा दी थी। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने पहले लगाए गए 200 पिंजरों के अतिरिक्त सिर्फ जुन्नार क्षेत्र में ही 1,000 नए पिंजरे स्थापित किए हैं।

महाराष्ट्र के वन मंत्री गणेश नाईक ने बताया कि तेंदुओं को पकड़ने के लिए वन विभाग की टीमों के साथ अब स्थानीय युवाओं और स्वयंसेवकों को भी शामिल किया जा रहा है, ताकि तलाश और बचाव अभियान को तेजी व मजबूती मिले।

पशु चारे पर उठी आपत्ति और सरकार की प्रतिक्रिया

कुछ पशु प्रेमियों ने पिंजरों के अंदर चारे के रूप में जानवरों के उपयोग को लेकर आपत्ति जताई थी। नाईक ने कहा कि उनकी बातों पर ध्यान दिया गया है और अब वैकल्पिक उपायों पर काम किया जा रहा है ताकि मानवीय तरीके से तेंदुओं को पकड़ा जा सके।

11 करोड़ रुपये का अतिरिक्त फंड

मंत्री ने बताया कि तेंदुओं से संबंधित आपात स्थितियों से निपटने के लिए मशीनरी, उपकरण और मानव संसाधन बढ़ाने हेतु सरकार की ओर से 11 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। उन्होंने कहा कि उद्देश्य केवल तेंदुओं को पकड़ना नहीं, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना और ग्रामीणों में सुरक्षा का भरोसा बढ़ाना है।

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