

Jay Pawar On Sunetra Pawar as CM Candidate: महाराष्ट्र में 2029 के विधानसभा चुनावों की आहट अभी से सुनाई देने लगी है। महायुति गठबंधन के भीतर नेतृत्व को लेकर चल रही खींचतान के बीच जय पवार के ताजा बयान ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। बारामती विधानसभा उपचुनाव में अपनी मां सुनेत्रा पवार की प्रचंड जीत के बाद मीडिया से बात करते हुए जय पवार ने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य अब 2029 में अपनी मां को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में देखना है। उन्होंने इसे अपने दिवंगत पिता अजित पवार के "अधूरे सपने" से जोड़ते हुए एक भावनात्मक दांव खेला है।
वर्तमान में महाराष्ट्र की राजनीति एक त्रिकोणीय सत्ता संघर्ष के दौर से गुजर रही है। महायुति गठबंधन में शामिल तीनों दलों के अपने-अपने मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं। भारतीय जनता पार्टी के पास देवेंद्र फडणवीस का सशक्त नेतृत्व है, जो राज्य में पार्टी का सबसे बड़ा चेहरा हैं। वहीं, एकनाथ शिंदे अपनी लोकप्रियता और जमीनी पकड़ के दम पर 2029 में फिर से कमान संभालने की उम्मीद रखते हैं। अब जय पवार के बयान ने सुनेत्रा पवार को भी इस दौड़ में तीसरे बड़े खिलाड़ी के रूप में खड़ा कर दिया है।
अजित पवार का हमेशा से यह सपना था कि वे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनें, लेकिन गठबंधन की राजनीति और परिस्थितियों के चलते वे केवल उपमुख्यमंत्री पद तक ही सीमित रहे। उनके निधन के बाद, सुनेत्रा पवार ने न केवल बारामती का किला संभाला, बल्कि उपमुख्यमंत्री के रूप में प्रशासनिक क्षमता का भी परिचय दिया है। जय पवार का मानना है कि उनकी मां में वह काबिलियत है कि वे राज्य का नेतृत्व कर सकें और अपने पिता के विजन को आगे बढ़ा सकें।
मई 2026 में हुए बारामती उपचुनाव के नतीजों ने यह साबित कर दिया कि अजित पवार के बाद भी एनसीपी का गढ़ सुरक्षित है। सुनेत्रा पवार ने जिस बड़े अंतर से स्वतंत्र और अन्य उम्मीदवारों को शिकस्त दी, उसने पार्टी के कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया है। इसी जीत के उत्साह में अब पार्टी के भीतर से उन्हें अगले चुनाव में मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में पेश करने की मांग उठने लगी है।
एक ही गठबंधन के भीतर तीन बड़े दावेदारों का होना भविष्य में सीटों के बंटवारे और नेतृत्व के चयन में बड़ी बाधा बन सकता है। जहां भाजपा राज्य की सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते स्वाभाविक रूप से मुख्यमंत्री पद पर अपना दावा रखेगी, वहीं शिंदे गुट और पवार गुट अपनी-अपनी ताकत के दम पर सौदेबाजी (Bargaining) करने की कोशिश करेंगे। जय पवार की यह 'इच्छा' गठबंधन के भीतर आगामी समय में 'फ्रेंडली फाइट' या फिर नए सत्ता समीकरणों को जन्म दे सकती है।