कहां हैं महिला बाल विकास मंत्री? महिलाओं पर राज्य में बढ़ते अत्याचार पर अदिति तटकरे से सुषमा अंधारे का सवाल

Sushma Andhare criticizes Aditi Tatkare: सुषमा अंधारे ने महिला सुरक्षा के मुद्दे पर महाराष्ट्र सरकार की महिला बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे को घेरा और महिला आयोग के खाली पद पर सवाल उठाए।
Sushma Andhare criticizes Aditi Tatkare
सुषमा अंधारे ने राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था पर सरकार को घेरा (फोटो क्रेडिट-X)
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Sushma Andhare On Aditi Tatkare: महाराष्ट्र में महिलाओं और मासूम बच्चियों के खिलाफ बढ़ते अपराधों ने विपक्षी दलों को सरकार के खिलाफ आक्रामक कर दिया है। शिवसेना (ठाकरे गुट) की फायरब्रांड नेता सुषमा अंधारे ने पुणे की हालिया घटनाओं का हवाला देते हुए राज्य की कानून व्यवस्था पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने सीधे तौर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे को निशाने पर लेते हुए कहा कि जब राज्य की बेटियां असुरक्षित महसूस कर रही हैं, तब विभाग की मंत्री कहां गायब हैं। अंधारे ने तंज कसते हुए कहा कि पद पर केवल इसलिए बने रहना कि 'पिता पार्टी के बादशाह हैं', लोकतंत्र के लिए घातक है।

सुषमा अंधारे ने सुरक्षा के बुनियादी मुद्दों को उठाते हुए कहा कि कामकाजी महिलाओं के बच्चों के लिए चलने वाले पालनाघरों (क्रेच) की स्थिति बेहद चिंताजनक है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मंत्री ने कभी इन क्रेच का सर्वेक्षण कराया है या इनकी सुरक्षा मानकों की जांच की है। अंधारे के अनुसार, पुणे के तिलक चौक और हाथी गणपति चौक जैसे इलाकों में 'कॉट बेसिस' पर दी जाने वाली जगहों में असुरक्षा का माहौल है, जिसके लिए सीधे तौर पर विभाग की निष्क्रियता जिम्मेदार है।

महिला आयोग और राजनीतिक नियुक्तियां

अंधारे ने राज्य महिला आयोग की रिक्तियों पर भी प्रहार किया। उन्होंने कहा कि सुनेत्रा पवार अब किसी को भी महिला आयोग का अध्यक्ष नियुक्त करें, लेकिन देरी के कारण जनता का भरोसा टूट रहा है। रूपाली चाकणकर के इस्तीफे के बाद से यह महत्वपूर्ण पद खाली है, जिससे पीड़ित महिलाओं के पास अपनी शिकायत दर्ज कराने का कोई आधिकारिक मंच नहीं बचा है। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या वे केवल 'लाडकी बहिन' जैसी योजनाओं के 1500 रुपये देकर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त होना चाहते हैं।

महायुति में 'कोल्ड वॉर' और मुंबई की राजनीति

मुंबई की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए सुषमा अंधारे ने महापौर रितु तावड़े की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि महापौर नगर निगम के मुद्दों से ज्यादा राज्य के मुद्दों पर बोल रही हैं, मानो वे मुख्यमंत्री बनना चाहती हों। अंधारे ने दावा किया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच चल रहा 'कोल्ड वॉर' अब सार्वजनिक हो चुका है। उन्होंने बच्चू कडू के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली से शिंदे को ज्यादा अधिकार मिलना फडणवीस को दरकिनार करने का संकेत है।

निजी नाराजगी और पार्टी के प्रति निष्ठा

अंत में अपनी व्यक्तिगत नाराजगी की खबरों को खारिज करते हुए सुषमा अंधारे ने कहा कि वे पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे की बहन की तरह हैं और उन पर अटूट विश्वास रखती हैं। उन्होंने विरोधियों को जवाब देते हुए कहा, "एक मेले से भगवान बूढ़ा नहीं हो जाता।" उनका इशारा स्पष्ट था कि अवसर न मिलने से उनकी ताकत कम नहीं हुई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके लिए 1500 रुपये की योजना से ज्यादा उनकी सुरक्षा और सम्मान महत्वपूर्ण है।

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