हाथों में नहीं जान लेकिन हौसले है बुलंद, पुणे में लकवाग्रस्त पूर्व सैनिक ने मुंह से बनाया सेना प्रमुख का चित्र
ड्यूटी के दौरान एक दुर्घटना में लकवाग्रस्त हुए 37 वर्षीय सेवानिवृत्त सैन्य विमानकर्मी ने मुंह में ब्रश रखकर चित्र बनाया। उन्होंने अपनी हिम्मत, मेहनत तथा लगन के बल पर कुछ भी कर जाने का उदाहरण सबके समक्ष पेश किया है।
- Written By: आंचल लोखंडे
लकवाग्रस्त पूर्व सैनिक ने बनाया चित्र। (सौजन्यः सोशल मीडिया)
पुणे: कहते हैं आपके हौसले बुलंद हो तो आपको अपने ध्येय तक पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता। आपके रास्ते की हर वो बाधा दूर हो जाती है जो आपके मार्ग में रोड़ा बनती है। शारीरिक विकलांगता हो या शारीरिक कोई भी कमी, बुलंद हौसले और आत्मविश्वास के आगे हर चुनौती घुटने टेक देती है। ऐसा ही कुछ अलग कर दिखाया है लकवाग्रस्त सेवानिवृत्त सैन्य विमानकर्मी ने…
ड्यूटी के दौरान एक दुर्घटना में लकवाग्रस्त हुए 37 वर्षीय सेवानिवृत्त सैन्य विमानकर्मी ने मुंह में ब्रश रखकर चित्र बनाया। और इसी के साथ उन्होंने अपनी हिम्मत, मेहनत तथा लगन के बल पर कुछ भी कर जाने का उदाहरण सबके समक्ष पेश किया है।
मुंह में ब्रश रखकर बनाया चित्र
लकवाग्रस्त मृदुल घोष ने मंगलवार को महाराष्ट्र के पुणे में ‘पैराप्लेजिक रिहैबिलिटेशन सेंटर’ यानी पीआरसी में सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी को अपने मुंह में ब्रश रखकर बनाया गया उनका चित्र भेंट किया। व्हीलचेयर पर बैठे घोष ने मंगलवार को कहा, “मैं अपने सेना प्रमुख का चित्र बनाकर गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। हालांकि मैं सेवानिवृत्त हो चुका हूं, लेकिन सशस्त्र बलों के साथ मेरा रिश्ता और लगाव कभी कम नहीं होगा।”
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पीआरसी में बढ़ी चित्रकला के प्रति रुचि
मृदुल घोष ने बताया कि 2010 में ड्यूटी के दौरान हुई एक दुर्घटना में घायल होने से उनके शरीर को लकवा मार गया था और इसके बाद वह वायु सेना से सेवानिवृत्त हो गए थे। 2015 में वे पीआरसी आए और यहां उन्हें चित्रकला के प्रति अपनी बढ़ती रुचि का पता चला, जबकि इस कला में उनका पूर्व में कोई इतिहास नहीं था।
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6 अन्य साथीयों को सिखाई चित्रकला
घोष ने कहा कि पीआरसी आने के बाद उन्होंने मुंह से चित्र बनाने का अभ्यास करना शुरू किया और उसके बाद से केंद्र में 6 अन्य साथी सैनिकों को भी यह सिखाना शुरू कर दिया। सेना प्रमुख और उनकी पत्नी सुनीता द्विवेदी ने मंगलवार को पुणे के किरकी में रेंज हिल्स स्थित पीआरसी का दौरा किया।
चित्र को पूरा करने में लगे 8 दिन
घोष ने कहा कि यह उनके लिए बहुत गर्व की बात है कि उन्हें सेना प्रमुख से मिलने और उन्हें वह चित्र भेंट करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि मैंने हमारे परिसर में सेना प्रमुख की उपस्थिति की खुशी में यह कलाकृति बनाई है। इस चित्र को पूरा करने में मुझे 7 से 8 दिन लगे।
पीआरसी केंद्र में रक्षा कर्मियों का पुनर्वास
बता दें कि पीआरसी केंद्र उन रक्षा कर्मियों के पुनर्वास के लिए जाना जाता है, जिन्हें राष्ट्र की सेवा करते समय रीढ़ की हड्डी में चोट लग चुकी है। यहां उनकी उचित देखभाल की जाती है और जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने के उद्देश्य से कई सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। यह काफी सराहनीय है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
