खाड़ी युद्ध का असर: एक्सपोर्ट ठप, पुणे और नाशिक के प्याज किसानों पर संकट , दाम गिरे

pune onion farmers crisis News: खाड़ी देशों में युद्ध के कारण प्याज का निर्यात ठप हो गया है, जिससे पुणे और नाशिक की मंडियों में आवक बढ़ने से कीमतें 400-900 रुपये तक गिर गई हैं।
The conflict in Gulf countries has halted onion exports, causing prices to crash in Pune and Nashik markets. Farmers are facing severe financial losses as local supply gluts drive rates down to 400-900 per quintal.
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Pune onion export ban impact News:  खाड़ी देशों में जारी युद्ध का असर अब प्याजा उत्पादक किसानों पर भी पड़ने लगा है। एक्सपोर्ट प्रभावित होने के कारण राज्य का प्याज बाहर नहीं जा पा रहा है। जिसके कारण राज्य के प्रमुख प्याज उत्पादक इलाकों पुणे और नाशिक में इस साल किसानों के लिए हालात बेहद चिंताजनक हो गई है। पूरे वर्ष प्याज के दाम स्थिर और अपेक्षाकृत कम रहने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

उत्पादन लागत बढ़ने के बावजूद बाजार में उचित कीमत नहीं मिलने से किसान हताश हैं और कई जगहों पर उन्हें मजबूरी में फसल औने-पौने दाम पर बेचनी पड़ रही है। पुणे और नाशिक के हजारों प्याज उत्पादक किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। मेहनत और निवेश के बावजूद उचित दाम नहीं मिलने से उनके सामने भविष्य को लेकर गंभीर चिंता खड़ी हो गई है।

किसान अब सरकार से ठोस और दीर्घकालिक समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं, ताकि उनकी मेहनत का सही मूल्य मिल सके और खेती फिर से लाभकारी बन सके। पुणे जिले के जुन्नर, आलेफाटा, चाकण, शिरूर और हवेली क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर प्याज की खेती होती है। वहीं नाशिक जिले के लासलगांव, पिंपलगांव बसवंत और संगमनेर देश के प्रमुख प्याज बाजार माने जाते हैं।

इन बाजारों में इस साल आवक लगातार अधिक रही, जिससे कीमतों पर दबाव बना रहा। आंकड़ों के अनुसार, राज्यभर के बाजारों में 1 लाख 46 हजार 672 क्विंटल तक प्याज की आवक दर्ज की गई है। इतनी बड़ी मात्रा में आपूर्ति होने के कारण बाजार में संतुलन बिगड़ गया और कीमतें नीचे आ गई। कई मंडियों में किसानों को उम्मीद के मुताबिक भाव नहीं मिल पाए

कर चुकाना भी मुश्किल

कीमतों की बात करें तो संगमनेर में औसतन 1 हजार 500 रुपये प्रति क्विंटल, लासलगांव-विचूर में करीब 1 हजार 800 प्रति क्विंटल भाव मिला, जबकि कई जगहों पर कीमतें गिरकर 400 रुपये से 900 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं। पुणे जिले में भी हालात बेहतर नहीं रहे। यहां लगभग 13 हजार क्विंटल प्याज की आवक के बावजूद किसानों को प्याज का औसत दर 1 हजार रुपये प्रति क्विंटल ही मिल सका।

किसानों का कहना है कि इस बार खेती की लागत-बीज, खाद, मजदूरी और सिंचाई सब कुछ महंगा हो गया, लेकिन बाजार में उस अनुपात में भाव नहीं बढ़े। जुन्नर के एक किसान ने दुख जताते हुए कहा कि पूरे साल करने के बाद भी हमें लागत का सही दाम नहीं मिला, अब कर्ज चुकाना भी मुश्किल हो रहा है।

बाजार में आवक अधिक

लासलगांव क्षेत्र के एक किसान ने बताया कि कभी प्याज के भाव 1 हजार 500 मिलते हैं तो कभी 500 रुपये तक गिर जाते हैं। इतने उतार-चढ़ाव में खेती करना घाटे का सौदा बन गया है। जानकारों के मुताबिक, इस संकट के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण बाजार में लगातार बढ़ती आवक और मांग में अपेक्षित वृद्धि का अभाव है। इसके अलावा, निर्यात नीति में अनिश्चितता और स्टॉक लिमिट जैसे सरकारी फैसलों ने भी बाजार को प्रभावित किया है। कई किसानों के पास पर्याप्त भंडारण सुविधा नहीं होने के कारण उन्हें तुरंत फसल बेचनी पड़ती है।

  • चूंकि गल्फ में एक्सपोर्ट रुका हुआ है, इसलिए प्याज का इनफ्लो बहुत है। यहां से दक्षिण भारत में प्याज भेजा जाता है और वहां प्याज एक्सपोर्ट नहीं हो रहा, इसलिए वहां भी प्याज की सप्लाई काफी कम है। युद्ध जैसे हालात होने की वजह से, एक्सपोर्टर प्याज ट्रांसपोर्ट करने को तैयार नहीं है। - अप्पा कोरपे, प्याज व्यापारी, मार्केट यार्ड, पुणे
  • युद्ध की वजह से गैस की कमी हो गई है। लोकल मार्केट में भी प्याज की कीमतों में कोई उम्मीद नहीं है। महंगाई बढ़ रही है, प्याज के अच्छे दाम नहीं मिलने से किसान परेशान हैं। सरकार को इस बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए और कोई रास्ता निकालकर किसानों को राहत देनी चाहिए। - अनिल दोरवे, किसान
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