नासिक का प्याज ट्रांसपोर्ट संकट में, लासलगांव मंडी ने उठाई आवाज, रेल रेक की कमी से प्याज सप्लाई बाधित

Nashik Onion Transport Delay: नासिक से देश के कई राज्यों में रेल से भेजा जाने वाला प्याज ट्रांसपोर्ट में देरी से प्रभावित हो रहा है। लासलगांव मंडी ने रेल रेक की कमी को लेकर रेल मंत्री से शिकायत की है।
Nashik's Onion Transport Faces Crisis; Lasalgaon Mandi Raises Alarm as Shortage of Rail Rakes Disrupts Supply.
Nashik Onion Trade Disruption ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Nashik Onion Trade Disruption: नासिक युद्ध की वजह से दुनिया भर में फैली अस्थिरता ने जहां प्याज का विदेश जाना मुश्किल कर दिया है, वहीं दूसरी ओर रेल से घरेलू बाजार तक पहुंचने में समय लग रहा है।

नासिक से उत्तर प्रदेश, बिहार, असम और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में रेल से प्याज भेजा जाता है। ट्रांसपोर्ट में देरी से व्यापारियों को जूझना पड़ रहा है, रेलवे प्रशासन पर्याप्त रेक नहीं दे रहा है।

दिए गए रेक दो से तीन दिन तक एक ही जगह पर खड़े रहते हैं, जिससे ट्रांसपोर्ट में देरी हो रही है, लासलगांव मार्केट कमेटी ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से शिकायत की है। जानकारी के अनुसार रेल मंत्रालय की तरफ इस समस्या को जल्द दूर करने का आश्वासन दिया गया है।

जल्दी खराब हो जाता है लाल प्याज

खरीफ, यानी लाल प्याज, एक जल्दी खराब होने वाला खेती का प्रोडक्ट है। इसे ज्यादा समय तक स्टोर नहीं किया जा सकता, अगर रेक में देरी होती है, तो इसकी क्वालिटी खराब हो जाती है। टहनियां टूट जाती है, वजन कम हो जाता है। व्यापारियों को नुकसान होता है। अगर मार्केट का दाम गिरता है, तो इसका सीधा असर किसानों पर पड़ता है। इसे देखते हुए, लासलगांव और नासिक जिलों से प्याज ट्रांसपोर्टेशन के लिए रेलवे रेक प्रायोरिटी पर और काफी संख्या में दिए जा सकते हैं,

युद्ध के चलते खाड़ी देशों में नहीं जा रहा प्याज

ईरान, इजराइल और यूएस के बीच संघर्ष की वजह से खाड़ी देशों को भारतीय प्याज का एक्सपोर्ट रुक गया है और सैकड़ों कंटेनर मुंबई के न्हावा शेवा यानी जवाहरलाल नेहरू पोर्ट पर फंसे हुए है। एक्सपोर्ट मैं मंदी का असर कीमत पर पड़ रहा है। जैसे-जैसे बाजार का भाव गिर रहा है। किसानों की नाराजगी आआंदोलन के जरिए जाहिर हो रही है, लासलगांव मार्केट कमेटी ने जब व्यापारियों से गिरते दामों पर बात की, तो रेलवे से जुड़ी दिक्कतें सामने आई, व्यापारी लोकल खरीदे गए प्याज को बाहरी मार्केट तक पहुंचाने के लिए ज्यादातर रेलवे पर निर्भर रहते है। लेकिन, अभी काफी रेक नहीं मिल रहे हैं। मार्केट कमेटी के चेयरमैन डी. के. जगताप ने कहा कि रेलवे कर्मचारियों और लोकोमोटिव ड्राइवरों की कमी की वजह से, दिए गए रेक दो से तीन दिन तक अपनी जगह से नहीं हटते। इससे ट्रांसपोर्टेशन मै देरी होती है।

धीमा ट्रांसपोर्ट और तापमान में बढ़ोतरी

नासिक जिले से प्याज रेल से देश के बड़े बाजारों में भेजा जाता है, जिसमें उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और बनारस, बिहार के पटना, असम के गुवाहाटी, पश्चिम बंगाल के कोलकाता शामिल हैं।

व्यापारियों का कहना है कि या तो रेक उपलब्ध नहीं हैं, अगर उपलब्ध हैं, तो माल लोड करने के लिए मजदूर नहीं हैं। व्यापारी इस सिस्टम पर भरोसा करने को तैयार नहीं हैं, क्योंकि रेल से माल कब पहुंचेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं।

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