पुणे में बढ़ा गुलियन-बैरे सिंड्रोम का खतरा, मरीज पहुंचे वेंटिलेटर पर, अजित पवार ने किया बड़ा ऐलान
पुणे में गुलियन-बैरे सिंड्रोम का खतरा बढ़ता जा रहा है। इस बीमारी के चलते पुणे के सभी अस्पताल अलर्ट हो गए है और मरीजों का इलाज कर रहे है। लेकिन इस बीमारी के चलते कई मरीज वेंटिलेटर तक पहुंच गए है।
- Written By: प्रिया जैस
गुलियन-बैरे सिंड्रोम पर अजित पवार (सौजन्य-एक्स)
पुणे: पिछले कुछ दिनों में दुर्लभ बीमारी गुलियन-बैरे सिंड्रोम से पीड़ित मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। इस बीमारी से अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि मरीजों की संख्या 74 तक पहुंच गई है। कुछ मरीज वेंटिलेटर पर हैं और इस बीमारी के इलाज का खर्च भी ज्यादा है।
इसके चलते इस बीमारी के मुफ्त इलाज की मांग की जा रही थी, जिसके बाद उपमुख्यमंत्री और पुणे जिले के पालकमंत्री अजित पवार ने घोषणा की है कि इस बीमारी का मुफ्त इलाज किया जाएगा। इससे पुणे के लोगों को राहत मिली है।
अजित पवार ने किया ऐलान
आज अजित पवार ने ध्वजारोहण किया और बाद में मीडिया से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि पुणे के कमला नेहरू अस्पताल में गुलियन-बैरे सिंड्रोम का इलाज मुफ्त में किया जाएगा। इस संबंध में नगर आयुक्त को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील भी की कि वे घबराएं नहीं और सावधानी बरतें। पुणे नगर निगम के कमला नेहरू अस्पताल में गुलियन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) का मुफ्त इलाज उपलब्ध होगा।
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14 मरीज वेंटिलेटर पर
पुणे में फिलहाल जीबीएस के 74 मरीज हैं, जिनमें से 14 वेंटिलेटर पर हैं और पांच मरीजों को छुट्टी दे दी जाएगी। प्रशासन ने इस बीमारी के लिए सभी जरूरी तैयारियां कर ली हैं। उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने नागरिकों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और सावधानी बरतें। कमला नेहरू अस्पताल में जीबीएस के लिए 50 बेड और 15 आईसीयू बेड आरक्षित किए गए हैं। पुणे नगर आयुक्त जल्द ही सभी स्वास्थ्य विभागों की बैठक लेंगे।
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जीबीएस के मरीज जिन निजी अस्पतालों में हैं, वहां नगर निगम के मेडिकल अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। नवले अस्पताल, पूना अस्पताल, भारती अस्पताल, दीनानाथ अस्पताल में मरीजों के बिलों की निगरानी की जाएगी। पुणे के सिंहगढ़ रोड पर नांदेड़गांव और किरकटवाड़ी इलाकों में जहां सबसे ज्यादा मरीज मिले हैं, वहां नगर निगम शुद्ध पानी की आपूर्ति करेगा।
