गणेशोत्सव में तेज आवाज से बचें, कानों की सेहत का रखें ध्यान, पुणेकर मंच की अपील

Pune Noise Pollution: ढोल-ताशों व डीजे के तेज शोर को लेकर लाउडस्पीकर विरोधी पुणेकर मंच और डॉक्टरों ने चेतावनी जारी की है। 100 डेसिबल से अधिक आवाज से बहरेपन और दिल के मरीजों को खतरा है।
Deafening noise from dhol-tashas and loudspeakers at the Pune Ganeshotsav.
पुणे गणेशोत्सव में ढोल-ताशा और लाउडस्पीकर का तेज शोर(सोर्स: एआई फोटो)
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Pune Loudspeaker Anti Noise Pollution Forum Advisory: गणेशोत्सव और आने वाले अन्य उत्सवों के दौरान तेज आवाज, ढोल-ताशे, डीजे और लाउडस्पीकर के बढ़ते इस्तेमाल के बीच लाउडस्पीकर विरोधी पुणेकर मंच ने नागरिकों से कानों की सेहत को लेकर सावधानी बरतने की अपील की है। मंच के अनुसार, लगातार तेज आवाज के संपर्क में रहने से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है और डॉक्टरों ने भी शोर से बचने की सलाह दी है।

मंच के अनुसार, तेज आवाज का असर केवल कार्यक्रम स्थल के आसपास मौजूद लोगों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आसपास रहने वाले नागरिक भी लंबे समय तक इसके संपर्क में आ सकते हैं। ऐसे में उत्सव के दौरान ध्वनि की तीव्रता और उसके संपर्क में रहने की अवधि को लेकर सावधानी जरूरी है।

लगातार तेज आवाज से सुनने की क्षमता पर असर

विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक तेज आवाज के संपर्क में रहने से सुनने की क्षमता धीरे-धीरे प्रभावित हो सकती है। शुरुआत में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते, लेकिन समय के साथ कानों में घंटी या आवाज गूंजना, कान बंद लगना, थकान, चिड़चिड़ापन, नींद में परेशानी और एकाग्रता में कमी जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं।

मंच का कहना है कि शोर से होने वाली श्रवण क्षति धीरे-धीरे विकसित हो सकती है और कुछ मामलों में स्थायी भी हो सकती है। इसलिए तेज आवाज वाले स्थानों पर लंबे समय तक रहने से बचने और आवश्यकता पड़ने पर श्रवण जांच कराने की सलाह दी गई है।

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ढोल-ताशे और डीजे की तेज आवाज से सावधानी

मंच के अनुसार, उत्सवों के दौरान ढोल-ताशे, डीजे और लाउडस्पीकर की आवाज कई बार 100 डेसिबल से अधिक तक पहुंच सकती है। ऐसी स्थिति में ध्वनि स्रोत के बेहद करीब रहने वाले लोगों के साथ-साथ आसपास के नागरिकों पर भी शोर का असर पड़ सकता है।

विशेष रूप से हृदय रोग और उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों को तेज आवाज से बचने और आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। लगातार शोर के कारण नींद और मानसिक एकाग्रता प्रभावित होने जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।

बीच-बीच में विराम लेना उपयोगी

लाउडस्पीकर विरोधी पुणेकर मंच ने नागरिकों से तेज आवाज वाले कार्यक्रमों के दौरान बीच-बीच में विराम लेने की अपील की है। मंच के अनुसार, हर घंटे वादन के बाद करीब 20 मिनट का विराम लेने से लगातार शोर के संपर्क की अवधि कम की जा सकती है।

मंच ने नागरिकों से कानों में असामान्य आवाज, लगातार घंटी बजने जैसी अनुभूति या सुनने में कमी महसूस होने पर विशेषज्ञ से सलाह लेने और समय-समय पर श्रवण जांच कराने की अपील की है।

उत्सवों के दौरान नागरिकों से मनोरंजन के साथ-साथ ध्वनि की तीव्रता और उसके संपर्क की अवधि का भी ध्यान रखने को कहा गया है।

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