विक्टोरिया तालाब (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Baramati Water Crisis: पुणे जिले के दौंड तहसील के वरवंड क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक विक्टोरिया तालाब का जलस्तर आश्चर्यजनक रूप से गिर गया है। जून 2025 में भारी बारिश के बाद पूरी तरह भरने वाला यह तालाब अब खाली होने की कगार पर है। सामाजिक कार्यकर्ता उत्कर्ष पाटिल द्वारा साझा किए गए आंकड़ों ने स्थानीय प्रशासन और जल संसाधन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ब्रिटिश शासन के दौरान 1876 में निर्मित विक्टोरिया तालाब न केवल एक जलाशय है, बल्कि इस क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत भी है। लगभग 310 एकड़ में फैले इस विशाल तालाब की भंडारण क्षमता 200 लाख घन फुट है। विडंबना यह है कि पिछले साल जून में यह अपनी पूरी क्षमता के साथ भरा हुआ था, लेकिन वर्तमान में इसमें केवल 18 प्रतिशत जल शेष बचा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस संकट के पीछे कोई एक कारण नहीं बल्कि कई कारकों का संयोजन है। वर्षों से तालाब की सफाई न होने के कारण इसमें भारी मात्रा में गाद जमा हो गई है, जिससे इसकी जल भंडार की क्षमता कम हो गई है। वहीं, बढ़ता वाष्पीकरण और पानी का अनियंत्रित तथा अवैध उपयोग इस गिरावट के मुख्य जिम्मेदार हैं। बिना किसी उचित नियोजन के पानी के दोहन ने इस तालाब को सूखने के मुहाने पर खड़ा कर दिया है।
विक्टोरिया तालाब का सूखना केवल पेय जल का संकट नहीं है, बल्कि यह इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के लिए भी घातक है। यह तालाब जनाई-शिरसाई योजना और प्रसिद्ध कुरकुंभ एमआईडीसी के लिए पानी का मुख्य स्रोत है। यदि जल स्तर इसी तरह गिरता रहा, तो रबी की फसलें बर्बाद हो जाएगी और औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन ठप हो सकता है। इससे न केवल आर्थिक नुकसान होगा, बल्कि हजारों श्रमिकों के रोजगार पर भी संकट के बादल मंडराने लगे।
दौंड प्रभाग जल संसाधन विभाग सहायक अभियंता संजय माने ने कहा जून में तालाब शत-प्रतिशत भरने के बावजूद जलस्तर का 18% पर आना गंभीर है। हम वर्तमान में पानी के उपयोग का ऑडिट कर रहे है, ताकि अवैध पंपिग को रोका जा सके। हमारी प्राथमिकता फिलहाल पीने के पानी को संरक्षित करना है। साथ ही, तालाब की भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए ‘गाद निकालने का प्रस्ताव वरिष्ठ स्तर पर भेजा जा रहा है।
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दौंड और बारामती तहसील के 8 गांवों के ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ बड़ी नाराजगी व्यक्त की है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन ने जल प्रबंधन में भारी लापरवाही बरती है। उन्होंने मांग की है कि सरकार तत्काल हस्तक्षेप करे और तालाब से गाद निकालने का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू किया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली भीषण गर्मी में उन्हें बूंद-बूंद पानी के लिए सरकारी टैंकरों का मोहताज होना पड़ेगा।
जल वितरण कर्मचारी विठ्ठल कोकाटे ने कहा घरेलू ग्रामीणों उपयोग से अपील में पानी है कि की वे एक-एका खेती बूंद बचाएं। यदि तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था या टैंकरों का नियोजन नहीं किया गया, तो अगले महीने से स्थिति हाथ से निकल सकती है।