मध्य रेलवे ने पूरा किया पांचवां डायमंड लेआउट अपग्रेड, पुणे यार्ड में ट्रेनों की आवाजाही होगी अधिक सुरक्षित

Pune Railway: पुणे यार्ड में ट्रैक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और परिचालन सुरक्षा में सुधार के लिए 52 किलोग्राम के डायमंड लेआउट को बदलकर 60 किलोग्राम के हैवी लेआउट में सफलतापूर्वक अपग्रेड किया है।
Railway employees carrying out track modernization work at the Pune railway yard
पुणे रेलवे यार्ड में ट्रैक आधुनिकीकरण का काम करते रेलवे कर्मचारी(सोर्सः सोशल मीडिया)
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Central Railway Diamond Track: मध्य रेलवे ने पुणे रेलवे यार्ड में ट्रैक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और ट्रेनों की परिचालन सुरक्षा में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी आधुनिकीकरण का काम पूरा किया है। 13 सितंबर को पुणे यार्ड में स्थित 52 किलोग्राम वाले 'डायमंड सिंगल स्लिप (नंबर 226/228)' लेआउट को हटाकर उसकी जगह भारी क्षमता वाले 60 किलोग्राम लेआउट को सफलतापूर्वक स्थापित किया गया।

निर्धारित समय से 15 मिनट पहले पूरा हुआ काम

यह जटिल तकनीकी कार्य रविवार को सुबह 8:15 बजे से शाम 5:00 बजे तक लिए गए एक नियोजित 'मेगा ब्लॉक' (Mega Block) के दौरान निष्पादित किया गया। पुणे रेलवे टीमों ने उत्कृष्ट तालमेल का परिचय देते हुए शाम 4:45 बजे ही काम पूरा कर लिया, जिससे मेगा ब्लॉक को निर्धारित समय से 15 मिनट पहले ही समाप्त कर दिया गया। यह पुणे यार्ड में अपग्रेड किया जाने वाला पांचवां 52 किलोग्राम डायमंड लेआउट है।

ट्रैक और सिग्नलिंग के इन प्रमुख घटकों को बदला गया

इस अपग्रेडेशन के तहत रेलवे कर्मियों ने चार स्टॉक रेल और चार टंग रेल के साथ-साथ उनके संबंधित फिटिंग्स को बदला। इसके अलावा दो एक्यूट क्रॉसिंग, दो ऑब्ट्यूस क्रॉसिंग, 12 अप्रोच रेल और दो लीड रेल भी बदली गईं। सिग्नलिंग और ट्रैक-इंटिग्रिटी को सुरक्षित करने के लिए टीमों ने छह इन-सीटू ग्लूएड जॉइंट्स और चार प्री-फैब्रिकेटेड ग्लूएड जॉइंट्स स्थापित किए। इसके साथ ही दो स्विच मोटर और उनकी रॉडिंग्स को भी बदला गया।

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200 से अधिक रेलकर्मियों की टीम रही तैनात

इस बड़े परिचालन में इंजीनियरिंग और सिग्नल एंड टेलीकम्युनिकेशन (S&T) विभागों के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिला। मौके पर लगभग 150 परमानेंट वे (P-Way) कर्मचारी और 50 S&T कर्मचारी तैनात किए गए थे, जिन्हें 4 P-Way पर्यवेक्षकों और 4 S&T पर्यवेक्षकों का मार्गदर्शन प्राप्त था। एक विशेषज्ञ ग्लूएड-जॉइंट टीम और चार लोहारों ने भी इस काम में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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