

Nagpur Fake Companies Money Laundering: नागपुर महाराष्ट्र में सक्रिय फर्जी कंपनियों के जरिए लगभग 2,000 करोड़ का भारी-भरकम फंड अवैध रूप से विदेशों में भेजे जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।
आयकर विभाग के नागपुर जांच निदेशालय की जांच में यह फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। इस खुलासे के बाद अब गायब और फरार जालसाजों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज करने की मांग तेज हो गई है।
लातूर की एक चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म के जरिए बिना किसी भौतिक सत्यापन या जांच के केवल फोन पर मिले निर्देशों के आधार पर प्रमाणपत्र जारी किए गए।
पिछले 3 वर्षों में 15 से 20 मामलों में बिना जांच सैकड़ों करोड़ रुपये विदेश भेजने की मंजूरी दी गई। विदेश फंड ट्रांसफर के लिए बेहद अस्पष्ट कारण दिए गए। एक मामले में तो सिर्फ 'सॉफ्टवेयर इंस्टॉलेशन' का हवाला देकर 200 करोड़ की भारी राशि विदेश भेज दी गई।
जिन कंपनियों के खातों से यह पैसा बाहर भेजा गया, वे दिए गए पते पर मौजूद ही नहीं हैं। इन शेल कंपनियों के निदेशकों, प्रमोटरों का कोई अता-पता नहीं है और इन्होंने कोई भी आयकर या जीएसटी रिटर्न दाखिल नहीं किया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए 'एसोसिएशन ऑफ सोशल एंड आरटीआई एक्टिविस्ट्स' के अध्यक्ष संजय थुल ने केंद्रीय राजस्व सचिव को पत्र लिखकर त्वरित कार्रवाई की गुहार लगाई है।
आयकर और जीएसटी विभाग अक्सर ऐसी लापता शेल कंपनियों के खिलाफ केवल प्रशासनिक नोटिस भेजकर औपचारिकता पूरी करते हैं।
राजस्व सचिव से मांग की गई है कि वे अधिकारियों को ऐसे सभी मामलों में स्थानीय पुलिस, राज्य अपराध शाखा या केंद्रीय एजेंसियों में अनिवार्य रूप से आपराधिक एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दें।