Bombay High Court ने पुणे मनपा को दिया जोरदार झटका, काम रोकने का आदेश किया रद्द
Bombay High Court ने पुणे मनपा द्वारा हाउसिंग प्रोजेक्ट पर लगाए काम रोकने के आदेश को अवैध ठहराते हुए रद्द किया। कोर्ट ने अधिकारियों व संबंधित डेवलपर पर कुल 30 लाख का जुर्माना लगाया।
- Written By: अपूर्वा नायक
पुणे मनपा और बॉम्बे हाई कोर्ट (सौ. सोशल मीडिया )
Bombay High Court PMC stay order: यह व्यक्तिगत लाभ के लिए अधिकारों के दुरुपयोग का मामला है। इस तरह की टिप्पणी करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुणे महानगरपालिका के कामकाज करने के तरीके की आलोचना करते हुए फटकार लगाई है।
यह फटकार एक हाउसिंग प्रोजेक्ट को काम रोकने का नोटिस भेजने के संबंध में लगाई गई है। कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि महानगरपालिका के इस मनमानी आदेश के कारण हाउसिंग प्रोजेक्ट अटक गया और कई घर खरीदारों को समस्याओं का सामना करना पड़ा है।
काम रोकने का आदेश रद्द
न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की खंडपीठ ने मनपा द्वारा जारी ‘काम रोकने के नोटिस’ को रद्द करते हुए कहा कि इस मामले से यह स्पष्ट होता है कि एक डेवलपर ने दूसरे डेवलपर पर हावी होने के लिए महानगरपालिका की मशीनरी का दुरुपयोग किया।
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साथ ही मनपा के अधिकारियों ने भी व्यक्तिगत लाभ के लिए इस दुरुपयोग को करने में डेवलपर का साथ दिया। इसकी वजह से घर का कब्जा मिलने की प्रतीक्षा कर रहे घर खरीदारों को अनावश्यक रूप से पीड़ा झेलनी पड़ी है। अदालत ने मनपा के संबंधित अधिकारियों पर 5 लाख और निजी डेवलपर वेलविल्ड मर्चेंट्स प्राइवेट लिमिटेड पर 25 लाख का जुर्माना भी लगाया है।
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49 लोगों ने दायर की थी याचिका
- पुणे के राजगृही रेसिडेसी प्रोजेक्ट के टावर्स ‘सी’ और ‘डी’ का विकास करने वाली मेसर्स अट्रिया कंस्ट्रक्शन्स और टावर ‘डी’ में घर खरीदने वाले 49 लोगों ने उच्च न्यायालय का रुख किया था जिन्हें मनपा द्वारा काम रोकने के बाद ऑक्युपेसी सर्टिफिकेट (OC) देने से इनकार कर दिया गया था।
- उनकी याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए अदालत ने मनपा के कामकाज पर कड़ी टिप्पणी करते हुए उपरोक्त आदेश दिए।
- अदालत ने टिप्पणी की कि वेलबिल्ड के याचिकाकर्ता अट्रिया कंस्ट्रक्शन के साथ अच्छे व्यवसायिक संबंध थे फिर भी वेलबिल्ड ने जिस तरह से मनपा की आधिकारिक मशीनरी का दुरुपयोग किया है, उसने हमारी अंतरात्मा को झकझोर दिया है।
- इस मामले में एक अजीब और परेशान करने बाली बात सामने आई। वेलबिल्ड द्वारा बनाए गए टावर्स ‘ए’ और ‘बी काफी समय पहले पूरे हो चुके थे और उनका कब्जा भी मिल गया था।
