चिंचवड़ में BJP के लिए बड़ी परीक्षा! जगताप परिवार का दबदबा तोड़ना आसान नहीं

Pune News: चिंचवड़ में बीजेपी के लिए वर्चस्व बनाए रखना इस बार मुश्किल साबित हो सकता है। जगताप परिवार का दबदबा, बगावत और नए चेहरों के बीच चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प रहेगा।
बीजेपी (pic credit; social media)
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Maharashtra News: आगामी पिंपरी चिंचवड़ महानगरपालिका चुनाव में बीजेपी के लिए चिंचवड़ विधानसभा क्षेत्र सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। यह क्षेत्र हमेशा से नगर निगम की सत्ता तक पहुंचने का रास्ता तय करता रहा है। खासकर दिवंगत विधायक लक्ष्मण जगताप के बाद यहां बीजेपी का दबदबा बनाए रखना आसान नहीं होगा।

2017 के चुनाव में चिंचवड़ से बीजेपी ने सबसे अधिक 33 नगरसेवक चुनवाकर अपना वर्चस्व साबित किया था। लेकिन लक्ष्मण जगताप के निधन के बाद अब उनके भाई विधायक शंकर जगताप, पूर्व विधायक अश्विनी जगताप और बीजेपी शहर अध्यक्ष शत्रुघ्न काटे के सामने इस बार पिछला रिकॉर्ड दोहराने की चुनौती है।

चिंचवड़ में कुल 13 वार्ड आते हैं, जिनसे सबसे ज्यादा 52 नगरसेवक चुने जाते हैं। पिछले चुनाव में बीजेपी को यहां 33 सीटें मिली थीं, जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस को 9, शिवसेना (एकीकृत) को 6 और चार निर्दलीय उम्मीदवार जीते थे। हालांकि, बीजेपी के चार नगरसेवक बीच में ही पार्टी छोड़ गए थे, जिससे संगठन को नए उम्मीदवार उतारने पड़ सकते हैं। यही वजह है कि इस बार चुनावी समीकरण काफी अलग और पेचीदा नज़र आ रहे हैं।

चिंचवड़ बीजेपी में इस समय तीन गुट स्पष्ट रूप से दिख रहे हैं- विधायक शंकर जगताप का गुट, पूर्व विधायक अश्विनी जगताप का गुट और शहर अध्यक्ष शत्रुघ्न काटे का गुट। इसके अलावा शिवसेना (शिंदे) के सांसद श्रीरंग बारणे भी चिंचवड़ के थेरगांव निवासी हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस बार उनके बेटे विश्वजीत और भतीजे नीलेश में से किसे टिकट मिलता है, यह भी चुनावी चर्चा का बड़ा मुद्दा है।

इसी तरह, वार्ड नंबर 25 वाकड़ से पूर्व नगरसेवक राहुल कलाटे की भूमिका भी अहम रहेगी। उन्होंने हर विधानसभा चुनाव में जगताप परिवार को चुनौती दी है और इस बार भी उनका रुख पूरे चुनाव का गणित बदल सकता है।

कुल मिलाकर, चिंचवड़ का चुनावी रण इस बार और भी दिलचस्प होगा। यहां बीजेपी के सामने सिर्फ सीटें जीतना ही नहीं, बल्कि अपने आंतरिक गुटबाजी और पुराने रिकॉर्ड को बनाए रखने की बड़ी चुनौती होगी।

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