पिंपरी-चिंचवड़ में बीजेपी को जोरदार झटका, नगरसेवक रवि लांडगे ने भी छोड़ी पार्टी
- Written By: संतोष मिश्रा
पिंपरी: पिछले आम चुनाव में निर्विरोध निर्वाचित होकर बीजेपी (BJP) की जीत का खाता खोलनेवाले नगरसेवक रवि लांडगे (Corporator Ravi Landge) ने पार्टी त्यागने का ऐलान किया है। शनिवार को उन्होंने बीजेपी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा (Resignation) दिया है। इस बारे में उन्होंने भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल (Chandrakant Patil) को अपना त्यागपत्र भेज दिया है। लांडगे के इस्तीफे से पिंपरी-चिंचवड़ (Pimpri-Chinchwad) में पहले सियासी भूकंप हो गया है, वह भी तब जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पुणे और दिल्ली में ‘नरेंद्र महाराष्ट्र में देवेंद्र’ का नारा लगाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पिंपरी-चिंचवड़ में पधार रहे हैं। रवि लांडगे के इस्तीफे से भोसरी विधानसभा में भाजपा को जोरदार झटका लगा है।
ऐन महनगरपालिका चुनाव से चंद दिनों पहले से पिंपरी-चिंचवड़ बीजेपी में ‘लीकेज’ शुरू हो गया है, जो कहीं थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन पार्टी के नगरसेवक इस्तीफा दे रहे हैं। अब तक वसंत बोराटे, चंदा लोखंडे, तुषार कामठे, माया बारणे ने नगरसेवक पद से इस्तीफा दिया है। अभी इसके सदमे से बीजेपी उबर भी नहीं पायी कि आज नगरसेवक रवि लांडगे ने सीधे तौर पर पार्टी की सदस्यता से त्यागपत्र देकर झटका दे दिया है।
रवि लांडगे ने स्थानीय नेतृत्व पर लगाए आरोप
पिछले महानगरपालिका चुनाव में बीजेपी ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को चारों खाने चित्त कर पिंपरी-चिंचवड़ के इतिहास में पहली बार महानगरपालिका पर परचम लहराया था। तब रवि लांडगे निर्दलीय निर्वाचित होकर बीजेपी की जीत का खाता खोलने वाले नगरसेवक साबित हुए। अब तक इस्तीफा देनेवाले नगरसेवकों की भांति उन्होंने भी पार्टी के स्थानीय नेतृत्व और नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
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लांडगे ने चंद्रकांत पाटिल को लिखा पत्र
नगरसेवक रवि लांडगे ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल को लिखे अपने त्याग पत्र में कहा कि मैंने अपने पिता, दिवंगत बाबासाहेब लांडगे और अपने चाचा, दिवंगत अंकुशराव लांडगे से प्रेरणा लेते हुए कम उम्र से ही बीजेपी के लिए काम करना शुरू कर दिया था। मेरे पिता और चाचा दोनों ने पिंपरी-चिंचवड़ में बीजेपी का अस्तित्व बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत की है। मैंने बचपन में उनकी कठिनाइयों को देखा और अनुभव किया है। तब से, बीजेपी के संस्कार मुझमें जड़ जमा चुके हैं। मेरे पूरे परिवार का राजनीतिक जन्म बीजेपी से हुआ है। पार्टी में सक्रिय होने के बाद से मैंने पूरे समर्पण के साथ काम किया है। उन्होंने कभी पार्टी के साथ विश्वासघात नहीं किया। उन्होंने भोसरी विधानसभा क्षेत्र में पार्टी के विकास के लिए कड़ी मेहनत की। उन्होंने पार्टी के पुराने वफादारों को ताकत दी और अपने साथ नए कार्यकर्ताओं को भी साथ लिया।
किसी के साथ भेदभाव नहीं किया
उन्होंने पार्टी के हितों को ध्यान में रखते हुए कभी भी पुराने और नए के बीच भेदभाव नहीं किया। एक वफादार भाजपा कार्यकर्ता के रूप में, मैं 2017 के नगरपालिका चुनावों में भोसरी के धावड़ेबस्ती वार्ड से निर्विरोध चुना गया था। इस पद के माध्यम से लगातार सभी के लिए न्याय की लड़ाई लड़ी, लेकिन लोगों को न्याय देते हुए एक पार्टी के तौर पर मजबूत समर्थन की जरूरत है, जो मुझे कभी नहीं मिला।
विधायक महेश लांडगे पर किया हमला
महानगरपालिका के जरिए भोसरी विधानसभा क्षेत्र में किए गए हर विकास कार्य में भ्रष्टाचार और सिर्फ भ्रष्टाचार हुआ है। चाहे चिखली में संतपीठ हो, नदी सुधार परियोजना हो या भोसरी फ्लाईओवर के तहत अर्बन स्ट्रीट डिजाइन परियोजना हो या कचरा डिपो में कचरे से ऊर्जा परियोजना हो, ऐसा कोई विकास काम नहीं है जो भ्रष्टाचार के बिना किया गया हो। बीजेपी के नगर अध्यक्ष और विधायक महेश लांडगे ने भ्रष्टाचार की देन भाजपा को दी हैं। महेश लांडगे के बीजेपी में शामिल होने के बाद से पार्टी की छवि एक भ्रष्ट पार्टी की हो गई है। पार्टी की ऐसी कलंकित छवि देखकर मेरे जैसे निष्ठावान कार्यकर्ता के लिए यह संभव नहीं है कि इसका समर्थन किया जाय। पार्टी में होते हुए भी विधायक महेश लांडगे के माध्यम से होने वाले भ्रष्टाचार का अक्सर कड़ा विरोध किया।
विकास कार्यों में भ्रष्टाचार व्याप्त
भ्रष्टाचार की मंशा से भोरी अस्पताल के निजीकरण को विफल करने के पार्टी के फैसले के खिलाफ मुझे सड़कों पर लड़ना पड़ा। महानगरपालिका के इतिहास में पहली बार बीजेपी की स्थायी समिति के अध्यक्ष को घूसखोरी निवारण विभाग ने रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तार किया है। इससे साफ है कि भोसरी विधानसभा क्षेत्र के विकास कार्यों में कितना भ्रष्टाचार व्याप्त है। इसलिए अब पार्टी में मेरी सियासी सांस घुट रही है। भ्रष्टाचार के विरोधी भोसारी विधानसभा क्षेत्र में वफादार पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के राजनीतिक अस्तित्व को खत्म करने के लिए साजिशें रची गईं। मेरे जैसा वफादार कार्यकर्ता कभी भी पार्टी की ताकत हासिल नहीं कर पाया। उस समय पार्टी सत्ता में नहीं थी तब मुश्किल समय में पार्टी को जिंदा रखने के लिए निष्ठावान कार्यकर्ताओं ने कड़ी मेहनत की, लेकिन जब मनपा में पार्टी सत्ता में आई तो बाहर से कई लोग आए। अब पार्टी का नेतृत्व बाहरी लोगों के हाथ में है। पार्टी के नेता भूल गए कि वफादारों पर थोपा गया बाहरी नेतृत्व स्वार्थी है। पार्टी के वरिष्ठ स्तर पर बार-बार शिकायत करने के बाद भी इसका कोई फायदा नहीं हुआ है। मैं पांच साल के लगातार अन्याय को सहने के बाद बीजेपी में अपनी प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहा हूं और तथ्य यह है कि पार्टी के नेता भी गलत काम करने वालों का समर्थन कर रहे हैं।
