Sunetra Pawar vs Akash More Baramati Bypoll (डिजाइन फोटो)
Baramati Bypoll Candidate 2026: महाराष्ट्र की सबसे चर्चित विधानसभा सीट बारामती पर उपचुनाव का बिगुल बज चुका है। पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद रिक्त हुई इस सीट पर उनकी पत्नी और मौजूदा उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार (NCP-महायुति) ने सोमवार को अपना नामांकन दाखिल किया। जहाँ एक तरफ महायुति और शरद पवार गुट इस चुनाव को निर्विरोध कराने की कोशिश में थे, वहीं कांग्रेस ने एडवोकेट आकाश विजयराव मोरे को मैदान में उतारकर मुकाबले को दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
आकाश मोरे के चुनावी मैदान में उतरने से बारामती का सियासी समीकरण पूरी तरह बदल गया है। कांग्रेस ने यहाँ ‘लोकतंत्र की रक्षा’ का हवाला देते हुए अपना उम्मीदवार खड़ा किया है, जिससे महाविकास अघाड़ी (MVA) के भीतर भी दरारें साफ नजर आने लगी हैं। शिवसेना (UBT) और शरद पवार गुट इस फैसले से असहज हैं, लेकिन कांग्रेस अपने रुख पर अड़ी हुई है। अब सवाल यह उठता है कि क्या अजित पवार के प्रति उमड़ी सहानुभूति की लहर के आगे आकाश मोरे टिक पाएंगे?
आकाश मोरे कोई नया नाम नहीं हैं; वे पूर्व विधान परिषद सदस्य (MLC) विजयराव मोरे के पुत्र हैं और वर्तमान में महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) के सचिव के रूप में कार्यरत हैं। पेशे से वकील आकाश मोरे धनगर समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। बारामती निर्वाचन क्षेत्र में धनगर मतदाताओं की संख्या निर्णायक भूमिका में है। कांग्रेस ने मोरे को टिकट देकर इसी बड़े वोट बैंक को साधने की कोशिश की है, जो परंपरागत रूप से पवार परिवार के साथ रहा है लेकिन हाल के वर्षों में कुछ मुद्दों पर नाराज भी दिखा है।
किसका पलड़ा भारी: विश्लेषण
| पक्ष | सुनेत्रा पवार (NCP – महायुति) | आकाश मोरे (कांग्रेस) |
| ताकत |
सहानुभूति लहर: अजित पवार के निधन के बाद जनता की सहानुभूति उनके साथ है। संगठनात्मक शक्ति: भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) का पूरा समर्थन। |
जातीय कार्ड: धनगर समुदाय का समर्थन मिलने की प्रबल संभावना। विपक्ष की एकजुटता: एमवीए के उन कार्यकर्ताओं का समर्थन जो निर्विरोध चुनाव के खिलाफ हैं। |
| चुनौती |
एंटी-इंकंबेंसी: लंबे समय से सत्ता में रहने के कारण कुछ वर्गों में नाराजगी। विपक्ष का घेराव: कांग्रेस द्वारा चुनाव को ‘लोकतांत्रिक’ बनाने का दबाव। |
संसाधनों की कमी: पवार परिवार के गढ़ में चुनावी मशीनरी से लड़ना बड़ी चुनौती। MVA में फूट: शरद पवार गुट ने उनके खिलाफ उम्मीदवार न उतारने का फैसला किया है। |
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चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि सुनेत्रा पवार का पलड़ा फिलहाल भारी नजर आ रहा है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण अजित पवार के निधन के बाद उपजी सहानुभूति की लहर है। साथ ही, उन्हें भाजपा और एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना का मजबूत कैडर सपोर्ट भी हासिल है। हालांकि, आकाश मोरे की मजबूती उनके जातीय आधार और युवाओं के बीच उनकी सक्रियता में है। यदि वे धनगर, दलित और मुस्लिम वोटों का एक बड़ा हिस्सा अपनी ओर मोड़ने में सफल रहे, तो सुनेत्रा पवार की राह मुश्किल हो सकती है।
बारामती उपचुनाव के लिए मतदान 23 अप्रैल को होना है और नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। इस चुनाव के परिणाम न केवल बारामती की राजनीति तय करेंगे, बल्कि यह भी स्पष्ट करेंगे कि अजित पवार की विरासत को जनता ने किस रूप में स्वीकार किया है। सुनेत्रा पवार के लिए यह अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूती से थामे रखने की परीक्षा है, वहीं आकाश मोरे के लिए यह खुद को एक बड़े क्षेत्रीय नेता के रूप में स्थापित करने का सुनहरा अवसर है।