सदाभाऊ खोत व रोहित पवार (सोर्स: साशल मीडिया)
Sadabhau Khot Attacks Rohit Pawar: बारामती विधानसभा उपचुनाव (Baramati By Election 2026) का बिगुल बजते ही महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा और अप्रत्याशित उलटफेर देखने को मिल रहा है। इस चुनावी रण में उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार उम्मीदवार हैं, लेकिन सुर्खियां शरद पवार गुट के विधायक रोहित पवार बटोर रहे हैं। रोहित पवार न केवल सुनेत्रा पवार के समर्थन में खड़े हुए हैं, बल्कि उन्होंने सक्रिय रूप से चुनावी मोर्चा संभालते हुए उनके लिए प्रचार भी शुरू कर दिया है। इस राजनीतिक कदम ने विरोधियों को हमला करने का मौका दे दिया है, जिसमें विधायक सदाभाऊ खोत सबसे आगे हैं।
रोहित पवार द्वारा सुनेत्रा पवार के समर्थन में आयोजित की जा रही बैठकों पर सदाभाऊ खोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर तीखा कटाक्ष किया है। खोत ने रोहित पवार के इस बदले हुए रुख को राजनीतिक अवसरवाद और ढोंग करार दिया।खोत ने अपनी पोस्ट में लिखा राजनीति का खेल शुरू हो गया है..!! सत्ता की बिसात पर स्वघोषित धृतराष्ट्र का उदय हुआ है! कभी सत्ता की हवस, कभी भावनाओं का सहारा, तो कभी जातिवाद के नाम पर यह सब ढोंग रचा जा रहा है।
खेळ मांडला खेळ मांडला..!
पुरोगामीपणाचा खेळ मांडला..!!
सत्तेच्या सारीपाटावर स्वयंघोषित पुरोगामी धृतराष्ट्र बनला..!
पुरोगाम्योनो, आम्ही पुरोगामीपणाचा खेळ मांडीला…!! सत्तेच्या जोरावरती
कधी भावनेच्या लाटेवरती
कधी जातीवादाच्या नावावरती पुरोगामीपणाचा खेळ मांडला…! pic.twitter.com/ljhwVpieSm — Sadabhau Khot (@Sadabhau_khot) April 16, 2026
अजित पवार के पैतृक गांव काटेवाडी से अपने प्रचार अभियान का आगाज करते हुए रोहित पवार काफी भावुक दिखाई दिए। उनके साथ उनके पिता राजेंद्र पवार और बहन सई पवार भी मंच पर मौजूद थीं। जनता को संबोधित करते हुए रोहित ने अपने पुराने दिनों को याद किया व कहां जब मैं छोटा था, तब मैंने स्वयं अजित दादा के लिए साइकिल रैली निकाली थी। राजनीतिक जीवन की शुरुआत में उन्होंने ही मुझे जिला परिषद का टिकट दिया था। उन्होंने इसे परिवार की एकजुटता का प्रयास बताया।
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भले ही रोहित पवार इस कदम को ‘परिवार की एकता’ और ‘मतों के विभाजन को रोकने की कोशिश’ बता रहे हों, लेकिन सदाभाऊ खोत जैसे नेताओं ने इसे ‘वैचारिक पतन’ करार देकर चुनावी तपिश बढ़ा दी है। अब सबकी नजरें बारामती की जनता पर टिकी हैं कि वे इस ‘पारिवारिक मेलमिलाप’ और ‘घोंगड़ी बैठकों’ को समर्थन देती है या इसे महज एक राजनीतिक स्टंट मानकर नकार देती है।