शरद पवार से डरते थे अजित पवार, कभी चाचा के लिए छोड़ी थी अपनी सीट, जानिए बारामती के 'दादा' की कहानी

Ajit Pawar Story: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का बारामती में एक विमान दुर्घटना में दुखद निधन हो गया है। लैंडिंग के वक्त संतुलन बिगड़ने से यह बड़ा हादसा हुआ, जिससे पूरा देश स्तब्ध है।
Ajit Pawar and Sharad Pawar Relationship
शरद पवार और सुप्रिया सुले के साथ अजित पवार (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Ajit Pawar Sharad Pawar Relation: महाराष्ट्र की राजनीति के 'दादा' कहे जाने वाले दिग्गज नेता और उपमुख्यमंत्री अजित पवार अब हमारे बीच नहीं रहे। बुधवार सुबह पुणे के बारामती में हुए एक भीषण चार्टर्ड विमान हादसे में उन्होंने अंतिम सांस ली। मुंबई से लौटते समय हुए इस हादसे ने न केवल पवार परिवार, बल्कि समूचे राज्य को गहरे शोक में डुबो दिया है।

अजित पवार मुंबई से अपनी कर्मभूमि बारामती की ओर लौट रहे थे। लैंडिंग से कुछ ही मिनट पहले विमान ने अपना नियंत्रण खो दिया और पास के एक खेत में क्रैश हो गया। इस दुखद घटना में उपमुख्यमंत्री सहित विमान में सवार पांच अन्य लोगों की भी मृत्यु हो गई। स्थानीय प्रशासन और राहत बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

शुरुआती जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि

22 जुलाई 1959 को अहमदनगर के देवलाली प्रवरा में जन्मे अजित पवार का नाता एक रसूखदार राजनीतिक और व्यापारिक परिवार से था। उनके पिता, अनंतराव पवार, प्रसिद्ध फिल्म निर्माता वी. शांताराम के 'राजकमल स्टूडियो' में कार्यरत थे। अजित के दादा गोविंदराव पवार बारामती के सहकारी क्षेत्र के स्तंभ थे। उनके बड़े भाई श्रीनिवास पवार एक सफल व्यवसायी हैं, जिनसे अजित अक्सर महत्वपूर्ण राजनीतिक और व्यक्तिगत परामर्श लिया करते थे।

चाचा शरद पवार से डरते थे अजित पवार

अजित पवार की प्रारंभिक शिक्षा महाराष्ट्र एजुकेशन सोसायटी हाई स्कूल, बारामती से हुई। जब वे कॉलेज में थे, तभी उनके पिता का साया उनके सिर से उठ गया। इसके बाद उन्होंने कोल्हापुर की शिवाजी यूनिवर्सिटी से अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी की। राजनीति के शुरुआती दिनों में उन्होंने अपने चाचा और दिग्गज नेता शरद पवार के निजी सचिव के रूप में काम किया। उन्होंने एक इंटरव्यू में स्वीकार किया था कि वे अपने चाचा से काफी डरते थे, लेकिन परिवार और राजनीति के बीच उन्होंने हमेशा एक स्पष्ट रेखा खींचकर रखी।

राजनीति के शिखर तक का सफर

अजित पवार का राजनीतिक सफर 1982 में एक सहकारी चीनी मिल के बोर्ड सदस्य के रूप में शुरू हुआ। 1991 में वे पुणे जिला सहकारी बैंक (PDC) के अध्यक्ष बने और लगातार 16 वर्षों तक उस पद पर बने रहे। 1993 में वे पहली बार बारामती से सांसद चुने गए, लेकिन अपने चाचा शरद पवार के लिए उन्होंने वह सीट छोड़ दी ताकि शरद पवार केंद्र में रक्षा मंत्री बन सकें।

इसके बाद अजित पवार ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1995 से लेकर 2014 तक वे लगातार बारामती से विधायक चुने जाते रहे। 1999 में विलासराव देशमुख की सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में उन्होंने सिंचाई विभाग का कार्यभार संभाला और राज्य के विकास में अपनी अमिट छाप छोड़ी। उनका जाना महाराष्ट्र के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

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