कुंडली में छुपा था हादसे का संकेत, कौन सा ग्रह बना अजित पवार के निधन की वजह?

Ajit Pawar Death Astrology: डिप्टी सीएम अजित पवार का विमान हादसे में निधन हो गया है। इस हादसे को लेकर ज्योतिषीय दृष्टि से सवाल उठने लगे हैं। क्या उनकी कुंडली में पहले से किसी बड़ी अनहोनी का संकेत था?
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अजित पवार (सोर्स: AI)
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Ajit Pawar Kundli Death Yog: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का निधन हो गया है। वे 66 वर्ष के थे। बुधवार सुबह करीब 8:45 बजे बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान उनका चार्टर्ड विमान हादसे का शिकार हो गया। इस दुखद घटना से पूरे महाराष्ट्र में शोक की लहर है। इस बीच अब इस हादसे को लेकर ज्योतिषीय दृष्टि से भी सवाल उठने लगे हैं। क्या अजित पवार की कुंडली में पहले से किसी बड़ी अनहोनी का संकेत था? ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा के अनुसार, उनकी जन्मकुंडली में ‘मारकेश योग’ मौजूद था, जो अचानक मृत्यु या बड़े हादसे का संकेत माना जाता है।

जन्म कुंडली के अनुसार ग्रहों की स्थिति

ज्योतिष के अनुसार अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को दोपहर 2:00 बजे देवलाली (महाराष्ट्र) में हुआ था। उनकी कुंडली में-

  • लग्न: तुला
  • राशि: मकर
  • नक्षत्र: धनिष्ठा (चतुर्थ चरण)

ग्रहों की स्थिति इस प्रकार बताई गई है

तुला लग्न में गुरु स्थित थे, शनि तीसरे भाव में, चंद्रमा कुंभ राशि में पंचम भाव में, केतु छठे भाव में, सूर्य और बुध की युति दशम भाव में, मंगल और शुक्र एकादश भाव में तथा राहु द्वादश भाव में बताए गए हैं।

किस ग्रह को माना जा रहा है ‘मारकेश’?

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, अजित पवार का जन्म मंगल की महादशा में हुआ था। 11 दिसंबर 2013 से बुध की महादशा शुरू हुई थी, जो 11 दिसंबर 2030 तक चलनी थी। वर्तमान में बुध की महादशा में गुरु की अंतर्दशा चल रही थी। उनकी कुंडली में मंगल को ‘मारकेश ग्रह’ बताया गया है।

राजनीति में सफलता का योग

उनकी कुंडली में सूर्य और बुध की युति से ‘बुधादित्य योग’ बना था, जो कार्यक्षेत्र में मजबूती और उच्च पद दिलाने वाला माना जाता है। गुरु का केंद्र से पंचम, सप्तम और नवम भाव पर दृष्टि होना उन्हें निरंतर राजनीति में सक्रिय और प्रभावशाली बनाए रखता है।

ग्रहों का गोचर और दुर्घटना के संकेत

ज्योतिषीय दृष्टि से वर्तमान ग्रह स्थिति को अनुकूल नहीं बताया गया है। मंगल अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है और जल से जुड़ा योग भी कुंडली में मौजूद था। शनि की दृष्टि चंद्रमा पर पड़ने से ‘विष योग’ बना हुआ था, जिसे ज्योतिष में अशुभ माना जाता है और यह अचानक दुर्घटना या मानसिक दबाव का संकेत देता है।

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