कृषि कार्यों के लिए मिट्टी-मुरूम पर रॉयल्टी खत्म खेती सुधार, निर्माण कार्यों के लिए मुफ्त देने का निर्णय

Farmers Soil Murum Royalty Free: महाराष्ट्र सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए खेती सुधार, कुआं और गोशाला निर्माण के लिए मिट्टी-मुरूम पर रॉयल्टी पूरी तरह खत्म कर दी है।
maharashtra government abolishes royalty on soil and murum for farmers
चंद्रशेखर बावनकुले (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Maharashtra Government Abolishes Royalty On Soil And Murum: महाराष्ट्र सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए खेती सुधार, कुआं, गोशाला और खेतघर के निर्माण के लिए उपयोग होने वाली मिट्टी और मुरूम जैसे गौण खनिजों पर रॉयल्टी पूरी तरह समाप्त कर दी है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने विधानसभा और विधान परिषद में इसकी घोषणा की। घोषणा के तुरंत बाद इस संबंध में शासनादेश भी जारी कर दिया गया। यह निर्णय विभिन्न विधायकों द्वारा लगातार उठाई गई मांगों के बाद लिया गया।

किसानों को नहीं रोका जाएगा

राजस्व मंत्री ने स्पष्ट कहा कि यदि किसान अपनी व्यक्तिगत खेती के उपयोग के लिए मिट्टी या मुरूम ट्रैक्टर, ट्रक या बैलगाड़ी से ले जाते हैं तो तहसीलदार, पुलिस या अन्य अधिकारी उन्हें नहीं रोकेंगे और न ही किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई करेंगे। यदि कोई अधिकारी किसानों को अनावश्यक रूप से परेशान करता है तो उसके खिलाफ सरकार सख्त कार्रवाई करेगी।

खेती और ग्रामीण विकास को मिलेगा बढ़ावा

महाराष्ट्र सरकार के अनुसार राज्य की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है, इसलिए ग्रामीण विकास को गति देने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। अब जलकुंभ, गांव तालाब, खेत तालाब, नाले, बंधारे, मालगुजारी तालाब, लघु सिंचन परियोजनाओं तथा किसान की अपनी जमीन से निकाली गई मिट्टी, गाद और मुरूम का उपयोग खेत सुधार, बरसात में कीचड़ और गड्ढे भरने, कुआं खोदने, गोशाला बनाने तथा खेतघर की मरम्मत जैसे कार्यों में किया जा सकेगा।

15 दिन में अनुमति देना होगी अनिवार्य

प्रक्रिया को सरल बनाते हुए किसानों को केवल स्थानीय पटवारी के पास आवेदन देना होगा। संबंधित मंडल अधिकारी को 15 दिनों के भीतर अनुमति देना अनिवार्य किया गया है। जल संसाधन विभाग के अधीन तालाब या नालों के लिए संबंधित विभाग तथा राजस्व नालों के मामले में तहसीलदार की अनापत्ति आवश्यक होगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह छूट केवल किसानों के व्यक्तिगत और कृषि उपयोग के लिए है। व्यावसायिक उपयोग या दुरुपयोग पाए जाने पर प्रचलित कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

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