महाराष्ट्र में 3 लाख छात्रों ने छोड़ा स्कूल, ऐसे सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
Maharashtra Education : महाराष्ट्र में कई जिलों में अचानक से छात्रों की संख्या में भारी गिरावट देखी गई है। इस बात का खुलासा कैसे हुआ और चौंकाने वाले आंकड़े क्या थे, इस खबर में जानिए।
- Written By: प्रिया जैस
छात्रों ने छोड़ा स्कूल (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Maharashtra News : महाराष्ट्र में एक ओर राज्य के 8,000 गांवों में स्कूल ही नहीं हैं वहीं दूसरी ओर सरकारी और अनुदानित स्कूलों में छात्रों की संख्या में भारी गिरावट देखी गई। राज्य की सरकारी और अनुदानित स्कूलों में पहली से 8वीं कक्षा तक के 3,36,416 छात्रों की गिरावट दर्ज की गई है।
ये आंकड़े चिंताजनक है। यह एक गंभीर स्थिति है जिसे लेकर अब शिक्षा विभाग सतर्क हुआ है। इस बात का खुलासा छात्रों के किताबों की संख्या से हुआ। समग्र शिक्षा अभियान के तहत इस साल भी छात्रों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें वितरित की गई लेकिन कई स्कूलों में छात्रों की संख्या से कम या अधिक पुस्तकें पहुंचीं।
महाराष्ट्र प्राथमिक शिक्षा परिषद से शिकायत
इसे लेकर कुछ संगठनों ने महाराष्ट्र प्राथमिक शिक्षा परिषद से सीधे शिकायत की। इसके बाद शिक्षा परिषद ने कुल छात्र संख्या की जांच कराई जिसमें चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। इस गिरावट के कारणों की जांच और समाधान हेतु परिषद के प्रकल्प संचालक संजय यादव ने सभी शिक्षा अधिकारियों को लिखित निर्देश दिया। परिषद ने छात्रों की संख्या में आई गिरावट के कारण की जांच करने के सख्त निर्देश दिए है।
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ऐसे हुई विद्यार्थी संख्या की जांच
- 1 करोड़ 94 हजार 360 अनुमानित पुस्तक वितरण के लिए स्वीकृत छात्र संख्या
- 97 लाख 57 हजार 944 महाराष्ट्र में मौजूदा छात्र संख्या (2023-24, यू-डायस डेटा)
- 3 लाख 36 हजार 416 पहली से 8वीं कक्षा तक घटे विद्यार्थी
- विदर्भ क्षेत्र के जिलों की वर्षभर की स्थिति
विदर्भ क्षेत्र के जिलों की वर्षभर की स्थिति
| जिला | घटे छात्र |
|---|---|
| नागपुर | 9,415 |
| गडचिरोली | 1,863 |
| गोंदिया | 3,877 |
| अकोला | 6,343 |
| अमरावती | 7,269 |
| भंडारा | 3,403 |
| बुलढाणा | 12,756 |
| चंद्रपूर | 7,077 |
| वर्धा | 4,425 |
| वाशीम | 6,545 |
| यवतमाल | 12,198 |
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8.73 लाख छात्रों को 11वीं में प्रवेश का इंतजार
महाराष्ट्र के शालेय शिक्षा विभाग द्वारा राज्यभर में संचालित 11वीं की ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया में तीसरा सप्ताह बीत जाने के 8.73 लाख छात्रों को अब तक प्रवेश नहीं मिल पाया है। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में अब तक केवल 50% छात्रों को ही प्रवेश मिल सका है। जबकि शेष छात्र प्रवेश के लिए प्रतीक्षा सूची में हैं। अभी तक की प्रक्रिया को लेकर छात्रों और पालकों में भारी नाराजी और असमंजस है। तकनीकी समस्याएं, राउंड के शेड्यूल में देरी और छात्रों की पसंद के अनुसार कॉलेज न मिलने की सीमाओं के कारण हजारों छात्र अब भी प्रवेश से वंचित है।
