Pune Municipal के स्वास्थ्य विभाग में 56% पद खाली, मरीजों की बढ़ती संख्या से व्यवस्था पर दबाव
Pune Municipal के स्वास्थ्य विभाग में 841 पद लंबे समय से खाली हैं। डॉक्टर और नर्सों की कमी के कारण शहर की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं और मरीजों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
- Written By: अपूर्वा नायक
पुणे मनपा (सोर्स: सोशल मीडिया)
Pune Municipal Health Department Staff: शहर और नए शामिल किए गए गांवों की लगातार बढ़ती आबादी के सामने पुणे महानगर पालिका की स्वास्थ्य सेवाएं बेहद अपर्याप्त साबित हो रही हैं। स्थिति यह है कि स्वास्थ्य विभाग में वर्ष 2013 के बाद से कोई नियमित भर्ती नहीं हुई है।
वहीं, लगातार हो रही कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति ने इस समस्या को और भी गंभीर बना दिया है। वर्तमान में महानगरपालिका के स्वास्थ्य विभाग में स्वीकृत स्थायी पदों में से 56 प्रतिशत पद रिक्त हैं, जिसका सीधा और प्रतिकूल असर शहर की स्वास्थ्य 2 व्यवस्था पर पड़ रहा है। मनपा द्वारा वर्तमान में 52 ओपीडी केंद्र, 20 प्रसूति गृह, 1 सामान्य अस्पताल, 1 संक्रामक रोग अस्पताल, 1 मोबाइल क्लीनिक, 2 ई-हेल्थ सेंटर और 1 स्मार्ट क्लीनिक संचालित किए जा रहे हैं।
841 पद लंबे समय से खाली
इन संस्थानों में राज्य सरकार की नीति के अनुसार डॉक्टर, नर्स, फार्मासिस्ट और अन्य आवश्यक कर्मचारियों की संख्या निर्धारित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। आंकड़ों पर गौर करें तो स्वास्थ्य विभाग और मनपा अस्पतालों में श्रेणी 1 से 4 तक कुल 1900 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से केवल 1059 कर्मचारी ही कार्यरत हैं, जबकि 841 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं।
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कर्मचारियों की इस भारी किल्लत से मरीजों की सेवा और प्रशासनिक कामकाज, दोनों बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। विभाग में विशेष रूप से वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों की भारी कमी देखी जा रही है। श्रेणी-1 में स्वीकृत 145 पदों के मुकाबले केवल 38 अधिकारी कार्यरत हैं, जबकि 107 पद रिक्त हैं।
मरीजों की बढ़ती संख्या व संसाधनों का अभाव
मनपा अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में प्रतिदिन उपचार के लिए आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। लेकिन पर्याप्त स्टाफ न होने के कारण मरीजों को उचित सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। विशेष रूप से नर्सिंग स्टाफ और सफाई कर्मचारियों की कमी से अस्पतालों के दैनिक संचालन में बाधा आ रही है। बीमारियों के बढ़ते प्रकोप और मुफ्त उपचार की बढ़ती मांग के बीच अतिरिक्त स्टाफ की सख्त जरूरत है, फिर भी भर्ती प्रक्रिया में देरी से विभाग पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
वर्तमान जनसंख्या को देखते हुए रिक्त पदों को भरने के साथ-साथ नए पदों का सृजन करना भी अनिवार्य है। इसके लिए प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शहर की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए नई भर्ती और पद निर्माण की प्रक्रिया जल्द शुरू करना हमारी प्राथमिकता है।
– डॉ। नीना बोराडे, स्वास्थ्य प्रमुख, पुणे मनपा
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संविदा पर काम करने को तैयार नहीं डॉक्टर
- विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता पर भी संकट खड़ा हो गया है। श्रेणी-2 में 269 स्वीकृत पदों में से 88 पद खाली हैं। श्रेणी-3। जिसमें नर्स, टेक्नीशियन और स्वास्थ्य सहायक जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल हैं। वहां 871 पदों में से 373 पद रिक्त हैं। वहीं श्रेणी-4 के सफाई और सहयोगी कर्मचारियों के 615 पदों में से 273 पद खाली पड़े हैं। नियमित भर्ती न होने के कारण मनपा को अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) के आधार पर डॉक्टरों की नियुक्ति करनी पड़ रही है।
- पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों के लिए विज्ञापन जारी किए गए थे, लेकिन कम मानदेय के कारण डॉक्टरों ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। इसके बाद बीएएमएस डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन वहां भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। चयन के बावजूद कई डॉक्टर काम पर नहीं आते, और जो शामिल होते हैं उनमें से भी लगभग 40 प्रतिशत डॉक्टर 3 से 6 महीने के भीतर नौकरी छोड़ देते हैं।
