आंबेडकर-उद्धव के रिश्ते में पड़ी खटास, वंचित अध्यक्ष ने बताया CM शिंदे की शिवसेना को असली; ठाकरे गुट का पलटवार

वंचित बहुजन आघाड़ी के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर एवं पूर्व मुख्यमंत्री व शिवसेना (उद्धव गुट) के पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे के संबंधों में खटास आ गई है। इस खटास में अब दोनों प्रमुख नेताओं के बीच आरोप प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं। सोमवार को आंबेडकर के एक बयान से उद्धव गुट तिलमिला गया। दरअसल, आंबेडकर ने कहा कि एकनाथ शिंदे की शिवसेना को ही शिवसैनिक असली शिवसेना मानते हैं।
Uddhav Thackeray and Prakash Ambedkar
उद्धव ठाकरे और प्रकाश आंबेडकर (फोटो: ANI)
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मुंबई. वंचित बहुजन आघाड़ी के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर एवं पूर्व मुख्यमंत्री व शिवसेना (उद्धव गुट) के पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे के संबंधों में खटास आ गई है। इस खटास में अब दोनों प्रमुख नेताओं के बीच आरोप प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं। सोमवार को आंबेडकर के एक बयान से उद्धव गुट तिलमिला गया। दरअसल, आंबेडकर ने कहा कि एकनाथ शिंदे की शिवसेना को ही शिवसैनिक असली शिवसेना मानते हैं। जिसके बाद पलटवार करते हुए उद्धव गुट ने कह दिया कि अपनी आदतों के कारण महाराष्ट्र की राजनीति में वंचित (उपेक्षित) रह गए।

लोकसभा चुनाव से पहले उद्धव की पार्टी से गठबंधन करनेवाले प्रकाश आंबेडकर, कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव गुट) और राकां शरदचंद्र पवार के गठबंधन वाली महाविकास आघाड़ी (एमवीए) में शामिल होने में नाकाम रहे थे। उद्धव से मिलने के लिए मातोश्री तक जाने तथा एमवीए के नेताओं के साथ कई दौर की बातचीत के बाद भी सीटों के बंटवारे पर सहमति नहीं बन पाई। नतीजतन आंबेडकर लोकसभा चुनाव अकेले लड़ने को मजबूर हुए थे।

लोकसभा के बाद आंबेडकर लगातार एमवीए के खिलाफ बयानबाजी करते रहे हैं। सोमवार को उन्होंने उद्धव को निशाना बनाया। आंबेडकर ने कहा कि उद्धव और एकनाथ शिंदे का लोकसभा चुनाव का स्ट्राइक रेट देखे तो शिंदे का स्ट्राइक रेट उद्धव से डबल है। इतना ही नहीं लोकसभा चुनावों में मुस्लिम समुदाय की वजह से उद्धव ठाकरे का स्ट्राइक रेट बढ़ गया है।

आंबेडकर के बयान पर भड़के उद्धव

आंबेडकर की टिप्पणी उद्धव को नागवार लगी। जिसके बाद पलटवार करते हुए उद्धव गुट के सांसद व प्रवक्ता अरविंद सावंत ने कहा कि आंबेडकर विद्वान हैं लेकिन उनकी बुद्धि राजनीतिक और सामाजिक रूप से कहीं खो गई है, इसलिए वे राजनीति में हमेशा 'वंचित' रहे हैं। वे खुद कोई सीट नहीं जीत सकते, लेकिन दूसरों को गड्ढे में गिराना, यही उनका काम है।

यह आश्चर्य की बात यह है कि उन्हें हमारा मार्गदर्शन करना चाहिए। राज्य के विकास के लिए हाथ से हाथ मिलाकर चलने की अपील करते हुए उन्होंने अपील की कि आंबेडकर अभी भी आंख खोल लें तो उन्हें समझ में आ जाएगा। राज्य के विकास के लिए उन्हें जिद छोड़कर, हाथ से हाथ मिलाकर, थोड़ा पीछे रहकर साथ चलना चाहिए।

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