Pimpri Chinchwad में नालों पर अतिक्रमण हटाने की तैयारी, मानसून से पहले बड़ी कार्रवाई
Pimpri Chinchwad में मानसून से पहले नालों पर अतिक्रमण हटाने और सफाई अभियान तेज किया गया है। प्रशासन ने जलभराव से बचने के लिए व्यापक कदम उठाए हैं। मनपा ने युद्धस्तर पर काम शुरू कर दिया है।
- Written By: अपूर्वा नायक
पिंपरी चिंचवड महानगरपालिका भवन फोटो, सोर्स- सोशल मीडिया
Pimpri Chinchwad Drain Cleaning: पिंपरी-चिंचवड़ शहर, विशेष रूप से एमआईडीसी क्षेत्र में प्राकृतिक नालों पर बढ़ते अतिक्रमण और गंदगी के कारण हर साल मानसून में जलजमाव और बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
इस गंभीर समस्या को देखते हुए पिंपरी-चिंचवड़ महानगर पालिका प्रशासन ने इस वर्ष समय रहते व्यापक कार्रवाई शुरू कर दी है। मनपा आयुक्त डॉ विजय सूर्यवंशी ने संबंधित अधिकारियों और एमआईडीसी प्रतिनिधियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि नालों पर किए गए सभी अतिक्रमण तत्काल हटाए जाएं और प्राकृतिक जल प्रवाह को बहाल किया जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिकारी मौके पर जाकर निरीक्षण करें और बंद पड़े नालों को पुनः चालू करें, ताकि वर्षा जल की निकासी सुचारू रूप से हो सके।
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प्राकृतिक नालों को बंद कर दिया गया हाल ही में आयोजित एक मनपा उच्च स्तरीय बैठक में एमआईडीसी क्षेत्र के नालों की स्थिति और मानसून पूर्व तैयारियों की समीक्षा की गई। बैठक में यह सामने आया कि कई कंपनियों ने पुराने नक्शों में दर्ज प्राकृतिक नालों को बंद कर दिया है या उन पर अवैध निर्माण कर लिया है।
Pimpri Chinchwad मनपा ने जतायी नाराजगी
इस पर प्रशासन ने नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसे अतिक्रमण न केवल नागरिकों, बल्कि उद्योगों के लिए भी नुकसानदायक हैं। आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बंद किए गए नालों और जलजमाव वाले स्थानों की सूची तैयार की जाए, जहां संभव हो, वहां नालों की मूल संरचना को बहाल किया जाए और जहां यह संभव न हो, वहां वैकल्पिक स्टॉर्म वॉटर लाइन बिछाई जाए। साथ ही, एमआईडीसी की खाली जमीनों और आरक्षित भूखंडों पर सक्रिय भू-माफिया पर भी कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
सभी छोटे-बड़े नालों की सफाई का काम शुरू
इसी के साथ, महानगर पालिका ने शहर के सभी छोटे-बड़े नालों की सफाई का काम भी युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है। प्रशासन के अनुसार, शहर में कुल 145 प्राकृतिक नाले हैं, जिनकी लंबाई लगभग 100 किलोमीटर है और चौड़ाई 2 से 11 मीटर तक है। इनमें से 143 नालों की सफाई का कार्य जारी है, जिसमें अब तक लगभग 50 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
पवना, मुला और इंद्रायणी नदियों में गिरता है पानी
- ये नाले पवना, मुला और इंद्रायणी नदियों में मिलते हैं, लेकिन खुले होने के कारण इनमें प्लास्टिक, कचरा और मलबा जमा हो जाता है, जिससे जल प्रवाह बाधित होता है।
- परिणामस्वरूप, बारिश के दौरान पानी सड़कों, दुकानों और घरों में घुस जाता है। पिछले वर्ष चिखली, रूपीनगर, पिपले गुरव, सांगवी, दापोडी और चिंचवड जैसे इलाकों में भारी जलभराव हुआ था, जिसके चलते सैकड़ों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करना पड़ा था।
- इस बार ऐसी स्थिति से बचने के लिए स्वास्थ्य, सिविल और क्षेत्रीय विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। सफाई कार्य के लिए मशीनों के साथ-साथ श्रमिकों की भी सहायता ली जा रही है।
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नालों पर अतिक्रमण बना बड़ी चुनौती
नालों की सफाई केवल औपचारिकता न हो, बल्कि गुणवत्ता के साथ समय पर पूरी की जाए। कार्य की नियमित समीक्षा की जा रही है और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सफाई से पहले और बाद की तस्वीरें भी ली जा रही हैं। मई में संभावित प्री-मानसून बारिश से पहले सभी नालों और ड्रेनेज सिस्टम को पूरी तरह दुरुस्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
– डॉ विजय सूर्यवंशी, मनपा आयुक्त
