परभणी जिला परिषद (सोर्स: सोशल मीडिया)
BJP vs NCP In Parbhani: परभणी जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव से पहले जिले की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। बीजेपी को सत्ता से बाहर रखने के लिए राकां ने बड़ी राजनीतिक रणनीति बनाते हुए विभिन्न दलों को एकजुट करने की कोशिश शुरू कर दी है। इन घटनाक्रमों के चलते परभणी जिला परिषद में सत्ता समीकरण बदलने की संभावना बढ़ गई है।
परभणी जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव 18 मार्च को होने वाला है। इसको लेकर सभी दलों ने अपनी राजनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। फिलहाल राज्य विधानसभा का अधिवेशन चल रहा है और प्रमुख नेता मुंबई में मौजूद हैं, इसलिए राजनीतिक हलचल भी मुंबई में ही होती नजर आ रही है।
परभणी जिला परिषद में कुल 54 सदस्य हैं। इनमें बीजेपी के 24, राकां के 15, उद्धव गुट के 6, शिंदे गुट के 5, कांग्रेस के 3 और 1 निर्दलीय सदस्य शामिल हैं। सत्ता स्थापित करने के लिए कम से कम 28 सदस्यों का समर्थन जरूरी है।
बीजेपी के पास सबसे ज्यादा 24 सीटें हैं और सत्ता बनाने के लिए उसे चार और सदस्यों की जरूरत है। जिले की पालकमंत्री मेघना बोर्डीकर ने पहले शिंदे गुट की शिवसेना के साथ मिलकर सत्ता बनाने का दावा किया था। लेकिन इसके बाद राकां ने राजनीतिक चाल चलते हुए बीजेपी को सत्ता से दूर रखने की रणनीति शुरू कर दी है।
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सूत्रों के मुताबिक एनसीपी ने शिंदे गुट की शिवसेना को परभणी जिला परिषद अध्यक्ष पद देने का प्रस्ताव दिया है। इसके बदले उपाध्यक्ष पद राष्ट्रवादी के पास रहेगा, जबकि सभापति पद उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना और कांग्रेस को देने का संभावित फार्मूला तय किया गया है।
इस नए समीकरण के लिए राकां ने अपने समर्थक सदस्यों को एकजुट भी कर लिया है। बताया जा रहा है कि राष्ट्रवादी के 15, उद्धव गुट के 6, कांग्रेस के 2 और 1 निर्दलीय सदस्य-कुल 24 सदस्य-फिलहाल ठाणे के एक होटल में ठहराए गए हैं। वहीं शिंदे गुट के 5 सदस्य भी मुंबई पहुंच सकते हैं। अगर ये सभी सदस्य एक साथ आते हैं तो कुल संख्या 29 तक पहुंच सकती है।