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खुद का जनरेटर, खुद का डीजल फिर भी महावितरण को दो टैक्स! नागपुर में होटल संचालकों का फूटा गुस्सा

Generator Power Charges: नागपुर के होटल व्यवसायियों ने आरोप लगाया है कि डीजल जनरेटर से उत्पादित बिजली पर भी ₹1.50 प्रति यूनिट शुल्क वसूला जा रहा है, जिससे होटल संचालन की लागत लगातार बढ़ रही है।

  • Written By: अंकिता पटेल
Updated On: Aug 02, 2026 | 05:16 PM

नागपुर में होटल व्यवसायियों से शुल्क वसूला (सोर्सः AI डिजाइन फोटो)

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Nagpur Hotel Power Charges: नागपुर सिटी में होटल उद्योग पहले से ही महंगी बिजली, बढ़ती डीजल कीमतों, कर्मचारियों के वेतन, जीएसटी, लाइसेंस शुल्क और अन्य परिचालन खर्चों से जूझ रहा है। अब होटल संचालकों के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है।

बिजली कटौती के दौरान ग्राहकों को निर्बाध सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए अपने खर्च पर लगाए गए डीजल जनरेटर से उत्पादित बिजली के उपयोग पर भी बिजली विभाग द्वारा 1.50 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से शुल्क वसूले जाने का होटल व्यवसायियों ने आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इससे होटल उद्योग पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है और व्यवसाय चलाना लगातार कठिन होता जा रहा है।

डीजल जनरेटर पर बिजली शुल्क से कारोबार की बढ़ी लागत

और अधिक बढ़ जाती है संचालन लागत होटल संचालकों का कहना है कि पर्यटन, व्यापारिक गतिविधियों और सामाजिक आयोजनों के चलते होटलों में 24 घंटे बिजली उपलब्ध होना अत्यंत आवश्यक है। बिजली आपूर्ति बाधित होने पर होटल की लिफ्ट, एयर कंडीशनिंग, रसोई, कोल्ड स्टोरेज, पानी की व्यवस्था, इंटरनेट, सुरक्षा प्रणाली और अन्य आवश्यक सेवाएं प्रभावित होती हैं।

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ऐसे में ग्राहकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए होटल मालिकों ने लाखों रुपये खर्च कर उच्च क्षमता वाले डीजल जनरेटर लगाए हैं। इन जनरेटरों की खरीद, स्थापना, रखरखाव और डीजल का पूरा खर्च भी होटल संचालक स्वयं वहन करते हैं। व्यवसायियों का कहना है कि जनरेटर चलाना पहले से ही अत्यंत महंगा पड़ता है।

डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण प्रति घंटे हजारों रुपये का खर्च आता है। इसके बावजूद यदि जनरेटर से उत्पन्न बिजली पर भी प्रति यूनिट शुल्क देना पड़े तो होटल संचालन की लागत और अधिक बढ़ जाती है। उनका कहना है कि यह खर्च अंततः छोटे और मध्यम होटल व्यवसायियों के लिए असहनीय साबित हो रहा है।

ग्राहकों को कैसे देंगे सुविधा

होटल उद्योग से जुड़े सदस्यों का कहना है कि आसपास के राज्यों की तुलना में हम लोगों पर पहले से ही अधिक बिजली दरें लागू हैं।
इसके अलावा जीएसटी, स्थानीय कर और अन्य शुल्क पहले से ही उनकी लागत बढ़ा रहे है। सोलर के साथ अब जनरेटर से उत्पादित बिजली पर भी अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने से होटल उद्योग को दोहरी-तिहरी मार झेलनी पड़ रही है।

संचालकों का कहना है कि जनरेटर कोई व्यावसायिक लाभकमाने का माध्यम नहीं है बल्कि यह केवल आपातकालीन व्यवस्था है। बिजली कटौती के दौरान यदि जनरेटर नहीं चलाया जाए तो होटल की सेवाएं पूरी तरह ठप हो सकती है।

इससे ग्राहकों को भारी असुविधा होगी। ग्राहक सुविधाओं पर सवाल उठायेंगे। इससे बुकिंग रद्द होने की संभावना बढ़ जाती है और होटल की प्रतिष्ठा पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। ऐसे में जनरेटर का उपयोग मजबूरी है, न कि अतिरिक्त कमाई का साधन।

यह भी पढ़ें:- नागपुर पुलिस कस्टडी से आरोपी फरार: हफ्ते में दूसरी घटना, 16 घंटे की मशक्कत के बाद दबोचा गया बदमाश

बढ़ता जा रहा है आर्थिक दबाव

पर्यटन और आतिथ्य उद्योग राज्य कौ अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है। हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार देने वाला यह उद्योग लगातार बढ़ती लागत और नए शुल्कों के कारण आर्थिक दबाव में आ गया है। यदि यही स्थिति बनी रही तो कई छोटे प्रतिष्ठानों के लिए कारोबार जारी रखना कठिन हो सकता है।

– तेजिंदर सिंह रेणु, अध्यक्ष, नागपुर रेजिडेंशियल होटल्स एसोसिएशन

राज्य सरकार और बिजली विभाग से मांग की है कि जनरेटर से उत्पादित बिजली पर लगाए जा रहे 1।50 रुपये प्रति यूनिट शुल्क की तत्काल समीक्षा की जाए, यदि सरकार होटल उद्योग को राहत नहीं देती तो इसका असर पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। होटल उद्योग के लिए बिजली दरों में राहत तथा अतिरिक्त शुल्कों को कम करने के तुरंत कदम उठाये जाने चाहिए।

– नितिन त्रिवेदी, सचिव

-नवभारत लाइव के लिए नागपुर से राजेंद्र मानकर की रिपोर्ट

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Published On: Aug 02, 2026 | 05:16 PM

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