विरार-अलीबाग कॉरिडोर को रफ्तार: 45% भूमि अधिग्रहण पूरा, अगस्त अंत तक प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य

Maharashtra Metro Rail Project: विरार-अलीबाग बहुउद्देशीय कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण में तेजी आई है। अब तक 45% कार्य पूरा हो चुका है और प्रशासन ने अगस्त अंत तक प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा है।
Land acquisition for the Virar-Alibaug Multimodal Corridor accelerates as 45% of the process completes. The administration aims to wrap up acquisition by August-end.
विरार-अलीबाग परियोजना प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Maharashtra Virar Alibaug Corridor  MSRDC Project: विरार-अलीबाग बहुउद्देशीय कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण पिछले दो वर्षों से अटका हुआ था, हालांकि, प्रशासन ने डेढ़ महीने में इस प्रक्रिया में तेजी लाते हुए 25 प्रतिशत भूमि अधिग्रहण पूरा कर लिया है। अब तक लगभग 45 प्रतिशत भूमि अधिग्रहण पूरा हो चुका है और शेष भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को अगस्त के अंत तक पूरा करने की योजना राजस्व विभाग ने बनाई है।

विरार-अलीबाग बहुउद्देशीय कॉरिडोर में मेट्रो भी शामिल है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का खाका (ब्लूप्रिंट) लगभग 9 साल पहले तैयार किया गया था, लेकिन विभिन्न तकनीकी कारणों से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया रुकी हुई थी।

पनवेल तालुका के 39 गांवों से गुजरने वाले इस कॉरिडोर के लिए लगभग चार हजार करोड़ रुपये का भूमि अधिग्रहण अपेक्षित है। रायगढ़ के जिलाधिकारी किशन जावले और पनवेल के उप-विभागीय अधिकारी पवन चांडक द्वारा किए गए नियोजन के कारण भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में अब तक एक भी शिकायत दर्ज न होने का दावा उप-विभागीय कार्यालय ने किया है।

दर बढ़ोतरी को लेकर अभी कोई निर्णय नहीं

दो दिन पहले भिवंडी क्षेत्र के परियोजना प्रभावित भू-स्वामियों द्वारा मंत्रालय पर मोर्चा निकालने के बाद, राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने किसानों और जनप्रतिनिधियों की बैठक ली। हालांकि, दर बढ़ोतरी को लेकर अभी तक कोई निर्णय नहीं हुआ है। वर्तमान में लगभग 25 प्रतिशत मामलों में उत्तराधिकार से संबंधित विवाद लंबित हैं, जबकि 12

से 15 प्रतिशत भू-स्वामियों ने दर कटौती के कारण अधिग्रहण प्रक्रिया पर असहमति जताई है। शेष भू-स्वामियों द्वारा स्वामित्व सिद्ध करने की प्रक्रिया जारी है। इसलिए अगस्त के अंत तक सहमति से भूमि अधिग्रहण पूरा करना राजस्व विभाग के सामने एक बड़ी चुनौती है।

पर्याप्त मुआवजा नहीं मिलने से जमीन मालिक नाराज

शुरुआत में पुरानी दरों के अनुसार लगभग 20 प्रतिशत भूमि अधिग्रहण पूरा होने के बाद, राजस्व विभाग ने नए सिरे से भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू करते समय दरों में कटौती कर दी। इस निर्णय से प्रति गुंठा (भूमि मापने की इकाई) लगभग सवा दो लाख से पांच लाख रुपये तक दरें कम होने के कारण भू-स्वामियों में भारी नाराजगी है। इस संबंध में जनप्रतिनिधियों द्वारा सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया गया, लेकिन अभी तक उसका कोई परिणाम नहीं निकला है।

विशेष बात यह है कि पिछले डेढ़ महीने में लगभग 25 प्रतिशत भू-स्वामियों ने नई दरों के अनुसार भूमि अधिग्रहण पर सहमति व्यक्त कर मुआवजा स्वीकार कर लिया है। दरों में कटौती का सबसे अधिक प्रभाव पाले खुर्द और सांगडे के किसानों पर पड़ा है। न्यायालय के निर्णय के अनुसार कॉरिडोर की अधिसूचना की तारीख से तीन साल की अवधि के दौरान इन दोनों गांवों में उस समय हुए खरीद-बिक्री के सौदों को मान्य किया गया।

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