रातभर पहरा देने के बाद सूखे हुए कुएं से पानी निकालती महिलाएं
पालघर: मई महीने में पालघर जिले के दूरदराज इलाकों समेत कई इलाकों में पानी की किल्लत की गंभीर समस्या देखने को मिली है। भले ही जिले में सूर्या नदी और उस पर बने डैम हैं, फिर भी जिले के कई हिस्सों में हर साल गर्मियों के मार्च, अप्रैल, मई और जून के महीनों में पानी की कमी की समस्या देखी जाती है। इस दौरान जिले के दूरदराज के इलाकों में बोरवेल, कुएं और तालाब का पानी सूख जाने की तस्वीर सामने आती हैं।
इस समय पालघर जिले के जव्हार, मोखाडा, वाडा, विक्रमगढ़ समेत कई इलाकों में पानी की किल्लत की समस्या है। बोईसर शहर के पास के कुछ गांवों में बोरवेल का जल स्तर कम होने से उसमें पानी आना बंद हो गया है। इसलिए नागरिकों को एमआईडीसी की और से एक/दो दिन बाद रात-बिरात एक आध घंटे के लिए आने वाले पानी पर निर्भर रहना पड़ता है, लेकिन प्रशासन का इस ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं है।
पालघर जिले के साथ वसई-विरार और मीरा-भायंदर नगर निगम की प्यास बुझाने वाला विक्रमगढ़ भी इस समय पानी की भारी किल्लत से जूझ रहा है। यहां तक कि जब कुछ ही दूरी पर डैम हैं, फिर भी सारशी के ग्रामीणों को पानी के लिए काफी लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। ग्राम पंचायत से बार-बार मांग करने के बाद भी ग्राम पंचायत द्वारा कोई भी उपाययोजना नहीं किये जाने के कारण यहां के ग्रामीण अपना आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं।
पालघर के विक्रमगढ़ के सारशी ग्राम पंचायत के क्षेत्र के नागरिक इस समय पानी की भारी कमी से जूझ रहे हैं। चूंकि गांव में स्थित कुएं और बोरवेल जल स्तर कम हो जाने के कारण इनका पानी सूख चुका है। जिसके चलते यहां की महिलाओं को थोड़े से पानी के लिए पूरी रात कुओं पर पहरा देना पड़ता है। थोड़े थोड़े पानी के इकठ्ठा करने के इंतजार में पूरी रात बितानी पड़ती हैं। इसके बावजूद भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। थोड़ा पानी मिल भी जाए तो वो दूषित होता है। इसलिए ग्रामीणों के स्वास्थ्य को लेकर भी सवाल खड़ा हो गया है। सारशी ग्रामपंचायत के अंतर्गत आने वाले गांवोंपाड़ो की आबादी तीन हजार से अधिक हैं और गांव के सभी कुएं सूख चुके हैं। इसके अलावा गांव में पहले से लागू नल जल योजना भी बंद है, जिससे यहां की महिलाओं को पानी के लिए काफी दूरी तय करनी पड़ती है।
पानी की किल्लत झेलने वाला सारशी गांव, धामनी और कवडास डैम से कुछ ही दूरी पर है। सूर्या परियोजना के इन्हीं दो डैम में से पालघर जिले के पूर्वी हिस्से के साथ-साथ बोईसर, तारापुर एमआईडीसी, वसई-विरार और मीरा-भायंदर नगर निगम को भी पानी की आपूर्ति की जाती है। लेकिन फिर भी हर साल यहां के स्थानीय नागरिकों को अप्रैल, मई और जून के महीने में पानी की कमी का सामना करना पड़ता है। ग्रामपंचायत सदस्यों का आरोप है कि, यहां की महिलाएं पिछले कुछ हफ्तों से पानी के लिए गुहार लगा रही हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है।
हर साल मानसून के दौरान पालघर के जव्हार, मोखाडा, विक्रमगढ़ इलाकों में सबसे ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की जाती है। लेकिन फिर भी जिला प्रशासन और सरकारी योजना के अभाव के कारण यहां के नागरिकों को कुछ ही महीनों में पानी की किल्लत का सामना करना पड़ता है। इसलिए प्रशासन को यहां की पानी समस्या को हमेशा के लिए दूर करने के लिए कदम उठाना जरूरी है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर प्रशासन कब जागेगा।