पानी लाने में देरी हुई तो शिक्षकों ने कर दी पिटाई! डर से पालघर स्कूल के छात्र भागे जंगल
Palghar News: पालघर के जिला परिषद स्कूल में पानी लाने में देरी पर शिक्षकों द्वारा पिटाई के आरोप लगे। डरे छात्र जंगल भागे। अभिभावकों की शिकायत के बाद शिक्षा विभाग ने जांच शुरू की।
- Written By: आकाश मसने
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI Generated Photo)
Teacher Beats Students In Palghar: महाराष्ट्र के पालघर जिले के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय में पानी लाने में देर होने पर छात्रों की पिटाई का मामला सामने आया है। घटना के बाद कुछ बच्चे भय के कारण स्कूल छोड़कर पास के जंगल में भाग गए।
अधिकारियों के अनुसार, यह घटना जव्हार के जांभूल मठ क्षेत्र स्थित जिला परिषद स्कूल में इस सप्ताह की शुरुआत में हुई, जिसके बाद शिक्षा विभाग ने जांच शुरू कर दी है।
छात्र की हालिया मौत के बाद और बढ़ी चिंता
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब जिले में ही कक्षा छह के एक छात्र की मौत ने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उस छात्र को कथित रूप से स्कूल देर से आने पर 100 उठक-बैठक करने की सजा दी गई थी, जिसके बाद उसकी मौत हो गई थी। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने अभिभावकों में आक्रोश बढ़ा दिया है।
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पानी लाने में देरी पर छात्रों को पीटा
अभिभावकों ने बुधवार को जिला परिषद को ज्ञापन सौंपकर बताया कि शिक्षकों ने बच्चों को लगभग एक किलोमीटर दूर स्थित स्रोत से पानी लाने भेजा था। देर से लौटने पर सभी छात्रों की पिटाई कर दी गई।
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पिटाई से डरकर छात्रों का एक समूह स्कूल परिसर छोड़कर नजदीकी जंगल की ओर भाग गया। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि शिक्षकों की इस क्रूर हरकत ने बच्चों में आतंक पैदा कर दिया है।
अभिभावकों की कड़ी कार्रवाई की मांग
अभिभावकों ने पालघर जिला परिषद से इस घटना में शामिल शिक्षकों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि बच्चों को श्रम के लिए भेजना और उनकी पिटाई करना न केवल गलत है, बल्कि बाल अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन भी है। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ रही ऐसी घटनाओं पर रोक नहीं लगाई गई तो बच्चों की सुरक्षा खतरे में पड़ती जाएगी।
शिक्षा विभाग ने शुरू की जांच
जिला परिषद की प्राथमिक शिक्षा अधिकारी सोनाली मातेकर ने बताया कि जांच शुरू कर दी गई है और रिपोर्ट के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी। टीम स्कूल में पहुंच चुकी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि दोषी पाए जाने पर शिक्षकों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।
