

महामंडल ने 2013 में 4-4 करोड़ रुपये की लागत से दो ड्रेजर मशीनें खरीदी थीं।
सीएसडी स्वामी पालघर के सातपाटी में बदहाल स्थिति में खड़ी है।
2023, 2024 और 2026 में मशीनों को किराए पर देने के लिए निविदाएं निकाली गईं।
बार-बार टेंडर के बावजूद दोनों मशीनों के लिए किरायेदार नहीं मिला।
8 Crore Dredger Machines Unused In Palghar: समुद्र से गाद निकालने के लिए महाराष्ट्र समुद्री महामंडल ने 8 करोड़ रुपए खर्च कर दो महंगी कटर सक्शन ड्रेजर मशीनें खरीदीं। लेकिन न इनका इस्तेमाल हुआ और न ही किरायेदार मिले। नतीजतन, करोड़ों की मशीनें जंग खा रही हैं।
तीन साल में कई बार निविदाएं निकालने के बावजूद ग्राहक नहीं मिलने और रखरखाव का हिसाब सामने न आने से महामंडल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में सरकारी फंड की बर्बादी के लिए जिम्मेदार कौन है, अब इसका जवाब मांगा जा रहा है।
पालघर जिले के सातपाटी में खड़ा ‘सीएसडी स्वामी’ ड्रेजर बदहाल स्थिति में है। इसके केबिन की छत, बाहरी चादरों और अन्य हिस्सों पर जंग लग चुकी है। वर्ष 2013 में 4-4 करोड़ रुपए की लागत से खरीदी गई इन मशीनों का वास्तविक इस्तेमाल कितना हुआ, इसका हिसाब अब तक सामने नहीं आया है।
महामंडल के सूत्रों के मुताबिक इन मशीनों का खुद इस्तेमाल करने के बजाय इन्हें किराए पर देने का फैसला किया गया। हालांकि, सरकारी नियमों के कारण किरायेदार मिलने में परेशानी आ रही है। इसी वजह से दोबारा निविदा प्रक्रिया शुरू की गई है।
महाराष्ट्र मंडल ने वर्ष 2023 में ‘सीएसडी स्वामी’ और ‘सीएसडी समर्थ’ दोनों मशीनों को किराए पर देने के लिए निविदा निकाली थी। वर्ष 2024 में केवल ‘सीएसडी स्वामी’ के लिए अलग से निविदा जारी की गई। इसके बाद 2026 में फिर दोनों मशीनों के लिए निविदा निकाली गई, लेकिन किरायेदार नहीं मिला। ऐसे में मशीनों की खरीद और उनके इस्तेमाल की योजना पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सातपाटी में खड़े ड्रेजर के कुछ हिस्से खुले में हैं, जबकि कुछ को तिरपाल से ढका गया है। लंबे समय से इस्तेमाल नहीं होने के कारण इसकी कार्यक्षमता प्रभावित होने की आशंका है।
वर्ष 2013 से अब तक मशीनों ने कितने घंटे काम किया, कितनी गाद निकाली और रखरखाव पर कितना खर्च हुआ, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है। दूसरी मशीन ‘सीएसडी समर्थ’ कहां है और उसकी मौजूदा स्थिति क्या है, यह भी स्पष्ट नहीं है।