Tejaswi Satpute Success Story (डिजाइन फोटो)
Tejaswi Satpute Success Story: महाराष्ट्र के चर्चित भोंदू बाबा अशोक खरात मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच टीम (SIT) की कमान एक ऐसी महिला अधिकारी को सौंपी गई है, जिन्हें विभाग में ‘लेडी शेरलॉक होम्स’ के नाम से जाना जाता है।
अहिल्यानगर (अहमदनगर) की IPS तेजस्वी सातपुते अब इस सनसनीखेज मामले की परतें खोलेंगी। एक समय स्कूल में ‘बेशिस्त’ और ‘आलसी’ मानी जाने वाली तेजस्वी का आईपीएस बनने तक का सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है।
तेजस्वी सातपुते की मां एक प्राथमिक शिक्षिका थीं और चाहती थीं कि उनकी बेटी पढ़ाई में अव्वल आए। लेकिन चौथी कक्षा तक तेजस्वी पढ़ाई के प्रति काफी लापरवाह थीं।
दिवाली का वो किस्सा: चौथी कक्षा की दिवाली की छुट्टियों तक तेजस्वी ने अपनी वर्कबुक (व्यवसायमाला) पर नाम तक नहीं लिखा था। नाराज होकर उनकी मां ने सारी किताबें इकट्ठा कीं और कहा, “अगर तुम्हें पढ़ना ही नहीं है, तो इन किताबों की होली जला देते हैं।”
बदलाव की शुरुआत: मां का यह कड़ा रूप देखकर तेजस्वी और उनकी बहन सहम गईं। उन्होंने मां के पैर पकड़कर माफी मांगी। यही वह क्षण था जिसने तेजस्वी को बदल दिया। उस साल वह स्कूल में प्रथम और केंद्र में द्वितीय आईं।
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तेजस्वी का शुरुआती सपना आसमान में उड़ने यानी पायलट बनने का था। लेकिन आंखों पर चश्मा लगने के कारण उन्हें यह सपना छोड़ना पड़ा।
शिक्षा: उन्होंने बीएससी बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई की, लेकिन रिसर्च में मन नहीं लगा।
यूपीएससी की ओर झुकाव: पुणे के लॉ कॉलेज में दाखिला लेने के बाद उनकी मुलाकात कुछ यूपीएससी अभ्यर्थियों से हुई। यहीं से उन्हें प्रशासनिक सेवाओं की प्रेरणा मिली।
सफलता: अपने दूसरे प्रयास में AIR 198 हासिल कर वह भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए चुनी गईं। पिछले 12 वर्षों में उन्होंने महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों में अपनी धाक जमाई है।
तेजस्वी सातपुते अपनी सूक्ष्म जांच (Minute Investigation) के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने एक किस्सा साझा किया कि कैसे एक ‘सड़क हादसे’ को उन्होंने हत्या के मामले में बदल दिया:
एक व्यक्ति का शव मिला जिसके सिर के दो टुकड़े हो गए थे। प्रथम दृष्टया यह भीषण एक्सीडेंट लग रहा था। तेजस्वी ने मौके का मुआयना किया और उन्हें एक बिना नंबर वाली संदिग्ध गाड़ी दिखी, जिसके अंदर खून की एक बूंद थी। जांच करने पर पता चला कि गाड़ी OLX पर बेची गई थी। अगले 5-6 घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद उन्होंने पता लगाया कि यह हादसा नहीं, बल्कि जमीन विवाद के चलते एक पहलवान द्वारा की गई हत्या थी। उनकी इसी पैनी नजर के कारण उन्हें जटिल केस सौंपे जाते हैं।