जलसंकट (सोर्स: सोशल मीडिया) 
नासिक

नासिक में मानसून की सुस्ती से गहराया जलसंकट, सूख चुके हैं 8 जलाशय और 354 गांवों में टैंकरों से पानी की सप्लाई

Nashik Water Crisis: नासिक में मानसून की देरी से जलसंकट गहरा गया है। जिले के 8 जलाशय पूरी तरह सूख चुके हैं और प्रशासन 354 प्रभावित गांवों में 179 टैंकरों से पानी की आपूर्ति कर रहा है।

रूपम सिंह

Nashik Water Crisis Monsoon Delay: मानसून के कोंकण तट पर दस्तक देने के बावजूद उसकी आगे की रफ्तार बेहद धीमी है। इसके चलते किसानों को दमदार बारिश के लिए अभी कुछ दिन और इंतजार करना होगा। मानसून की इस सुस्ती के कारण नाशिक जिले के ग्रामीण इलाकों में जलसंकट और गहरा गया है।

नासिक जिले के बांधों में अब केवल 26 प्रतिशत जलसाठा ही शेष बचा है। वर्तमान में जिला प्रशासन द्वारा प्रभावित 354 गांवों और ढाणियों की 3 लाख 18 हजार 708 आबादी को 179 टैंकरों के जरिए पानी की आपूर्ति की जा रही है। मानसून में हो रही इस देरी ने खरीफ सीजन की फसलों को भी संकट में डाल दिया है। मौसम विभाग के ताजा अनुमान के मुताबिक, 15 जून के बाद ही मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने की संभावना है।

8 मध्यम व लघु जलाशय पूरी तरह सूखे

इस साल भीषण गर्मी के कारण बांधों के पानी का तेजी से वाष्पीकरण हो रहा है, जिससे कुल जलसाठा घटकर 26.66 प्रतिशत पर आ गया है। जिले के आठ मध्यम व लघु जलाशय पूरी तरह सूख चुके हैं, जिससे शहरी और ग्रामीण इलाकों में स्थिति चिंताजनक हो गई है। नासिक जिले के कुल 26 मुख्य जलाशयों (7 बड़े और 19 मध्यम) में अब 18,827 मिलियन क्यूबिक फीट उपयोगी पानी बचा है। जून का पहला हफ्ता बीतने के बाद भी बारिश न होने से प्रशासन के सामने बचे हुए पानी का सटीक नियोजन करने की बड़ी चुनौती है।

केवल किसान केवल शुरुआती बारिश के भरोसे बुआई करने की जल्दबाजी न करें। साथ ही, बिजली कड़कने के दौरान पेड़ों, टिन शेड, इलेट्रिक ट्रांसफार्मर, बिजली के खंभों और हाई-टेंशन लाइनों के पास खड़े होने से बचें।

- नासिक जिला प्रशासन

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