नासिक में गहराया जलसंकट: बांधों में सिर्फ 26% पानी, मानसून की धीमी रफ्तार से खरीफ सीजन पर संकट
Nashik Water Shortage: नासिक जिले में मानसून की धीमी रफ्तार के कारण जलसंकट गहरा गया है। जिले के प्रमुख बांधों में केवल 26 प्रतिशत जलसाठा बचा है।
- Written By: आंचल लोखंडे
Nashik Water Crisis (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडीया)
Nashik Water Crisis: मानसून के कोंकण तट पर दस्तक देने के बावजूद उसकी आगे की रफ्तार बेहद धीमी है। इसके चलते किसानों को दमदार बारिश के लिए अभी कुछ दिन और इंतजार करना होगा। मानसून की इस सुस्ती के कारण नाशिक जिले के ग्रामीण इलाकों में जलसंकट और गहरा गया है। जिले के बांधों में अब केवल 26 प्रतिशत जलसाठा ही शेष बचा है। वर्तमान में जिला प्रशासन द्वारा प्रभावित 354 गांवों और ढाणियों की 3 लाख 18 हजार 708 आबादी को 179 टैंकरों के जरिए पानी की आपूर्ति की जा रही है।
मानसून में हो रही इस देरी ने खरीफ सीजन की फसलों को भी संकट में डाल दिया है। मौसम विभाग के ताजा अनुमान के मुताबिक, 15 जून के बाद ही मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने की संभावना है। इस साल भीषण गर्मी के कारण बांधों के पानी का तेजी से वाष्पीकरण हो रहा है, जिससे कुल जलसाठा घटकर 26।66 प्रतिशत पर आ गया है। जिले के आठ मध्यम व लघु जलाशय पूरी तरह सूख चुके हैं, जिससे शहरी और ग्रामीण इलाकों में स्थिति चिंताजनक हो गई है। जिले के कुल 26 मुख्य जलाशयों (7 बड़े और 19 मध्यम) में अब केवल 18,827 मिलियन क्यूबिक फीट उपयोगी पानी बचा है। जून का पहला हफ्ता बीतने के बाद भी बारिश न होने से प्रशासन के सामने बचे हुए पानी का सटीक नियोजन करने की बड़ी चुनौती है।
प्रमुख बांधों में वर्तमान जलसाठा (प्रतिशत में):
- गंगापुर: 44.42%
- मुकणे: 29.23%
- करंजवन: 16.85%
- ओझरखेड: 36.19%
- दारणा: 16.73%
- भावली: 24.34%
- कादवा: 20.26%
- चणकापुर: 23.82%
- गिरणा: 30.28%
इन बांधों ने छुआ तल (सूखने की कगार पर):
वाघाड (1.39%), भोजापुर (0.83%), वाकी (8.27%), भाम (3.33%), पुनद (5.5%), तिसगांव (5.5%) और पुणेगांव (2.27%)।
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प्रतिदिन टैंकरों के 395 फेरे:
जिले के कुल 654 गांवों और ढाणियों को इस समय पानी की भीषण किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन द्वारा तैनात 179 टैंकरों के माध्यम से प्रतिदिन 395 फेरे लगाकर इन क्षेत्रों में पानी पहुंचाया जा रहा है।
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येवला तालुका में सर्वाधिक किल्लत:
प्रशासन ने संकट से निपटने के लिए जल आपूर्ति के लिए 22 और टैंकरों के लिए 55 निजी कुओं का अधिग्रहण किया है। जिले के येवला तालुका में स्थिति सबसे गंभीर है, जहां 44 गांवों और 70 ढाणियों में पानी की भारी कमी के कारण सर्वाधिक 44 टैंकर चलाए जा रहे हैं। इसके बाद नांदगांव में 36, इगतपुरी में 21, सिन्नर में 18 और मालेगांव में 17 टैंकर कार्यरत हैं।
प्रतिक्रिया :
नासिक जिला प्रशासन ने कहा कि किसान केवल शुरुआती मानसूनी-पूर्व या तूफानी बारिश के भरोसे बुआई करने की जल्दबाजी न करें। साथ ही, बिजली कड़कने के दौरान पेड़ों, टिन शेड, इलेक्ट्रिक ट्रांसफार्मर, बिजली के खंभों और हाई-टेंशन लाइनों के पास खड़े होने से बचें।
