

रामबाबू चौबे
Trimbakeshwar Akhada Parishad Controversy: आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है, लेकिन प्रशासन, सरकार और अखाड़ों के बीच समन्वय स्थापित करने वाली शीर्ष संस्था अखाड़ा परिषद खुद भीषण आंतरिक कलह में उलझकर प्रभावहीन साबित हो रही है।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद में चल रही असली-नकली की खींचतान और गुटबाजी का सीधा खामियाजा कुंभ मेले से जुड़ी बुनियादी विकास योजनाओं और निर्माण कार्यों को भुगतना पड़ रहा है। त्र्यंबकेश्वर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद पर अभी तक नियुक्ति न होने के कारण संतों और महंतों में भारी रोष व्याप्त है।
पूर्व सिंहस्थ कुंभ मेले के दौरान त्र्यंबकेश्वर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष आनंद अखाड़े के अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी सागरानंद सरस्वती थे, जिनके सफल नेतृत्व में सभी कार्य संपन्न हुए थे। उनके ब्रह्मलीन होने के बाद से यह पद रिक्त चल रहा है।
उम्मीद थी कि आगामी कुंभ मेले से पहले इस पद पर किसी संत की नियुक्ति हो जाएगी, परंतु अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद में चल रहे आंतरिक विवादों और 'असली-नकली' की खींचतान के कारण त्र्यंबकेश्वर में अध्यक्ष का चुनाव या नियुक्ति अब तक नहीं हो पाई है।
नासिक कुंभ मेले के दौरान अखाड़ा परिषद की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। यह प्रशासन, सरकार और अखाड़ों के बीच समन्वय स्थापित करती है। शाही स्नानों के क्रम और व्यवस्था का निर्धारण करती है। अखाड़ों की आपसी गलतफहमियों को दूर करने और प्रशासनिक सुविधाओं पर नजर रखने की जिम्मेदारी उसी की होती है। अब जबकि कुंभ मेले के आयोजन में समय बहुत कम बचा है, तब भी अध्यक्ष पद का रिक्त रहना व्यवस्थाओं के लिए बड़ा संकट बनता जा रहा है।
आनंद अखाड़े के अध्यक्ष और दिवंगत सागरानंद सरस्वती के उत्तराधिकारी स्वामी शंकर आनंद सरस्वती ने बताया कि अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष न होने के कारण प्रशासन की मनमानी चल रही है। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि अखाड़ों में निर्माण कार्यों के टेंडर पास हुए महीनों बीत चुके हैं, लेकिन जमीन पर एक भी काम शुरू नहीं हुआ है।
इस संदर्भ में स्वामी शंकर आनंद सरस्वती ने हाल ही में नासिक दौरे पर आए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने मांग की थी कि तय समय सीमा में काम पूरा करने के लिए दिन-रात काम करना होगा।
हालांकि, इसके जवाब में उन्हें केवल यह आश्वासन मिला कि मार्च तक हर हाल में सभी निर्माण कार्य पूरे हो जाएंगे। लेकिन मौजूद सुस्त प्रशासनिक सक्रियता को देखते हुए संतों का मानना है कि सरकार और प्रशासन के ये दावे पूरी तरह हवा-हवाई साबित हो रहे हैं।