नाशिक में ऑनलाइन पढ़ाई से तंग आकर 11वीं की छात्रा ने की आत्महत्या
- Written By: दिपक.पांडे
File Photo
नाशिक : नाशिक जिले (Nashik District) में छात्राओं (Girl Students) द्वारा आत्महत्या (Suicide) का सिलसिला जारी है। अब सुरगाणा (Surgana) में ऑनलाइन पढ़ाई (Online Studies) में दिक्कत आने की वजह से एक 11वीं की छात्रा ने आत्महत्या कर ली है।
इस घटना से जिला एक बार फिर से सहम गया ह। अब सवाल उठ रहा है कि ऑनलाइन पढ़ाई से फायदा हो रहा है क्या ? कोरोना का सबसे ज्यादा असर विद्यार्थियों और छोटे बच्चों पर पड़ा है। स्कूल और कॉलेज निरंतर बंद रहने से उनकी पढ़ाई बाधित (Hampered) हो रही है।
स्कूल में लगाई फांसी
अलुंगण के पोस्ट बेसिक अनुदानित आश्रम स्कूल की यह छात्रा 11वीं के साइंस फैकल्टी में थी। सोमवार से पहली से 12 तक के क्लास शुरू हो गए है। लेकिन इस छात्रा के पास खुद का मोबाइल नहीं था। इस वजह से ऑनलाइन क्लास और पढ़ाई में वह अन्य विधार्थियों से पीछे छूट रही थी। अन्य का मोबाइल लेकर उसे ऑनलाइन क्लास करना पड़ता था। लेकिन इसके बावजूद उसकी पढ़ाई पूरी नहीं हुई थी। पढ़ाई के बढ़ते दबाव और स्कूल खुलने का प्रेशर वह बर्दाश्त नहीं कर पाई। आखिरकार उसने सोमवार को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
सम्बंधित ख़बरें
डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में काम करेंगी सुप्रिया सुले, ऑपरेशन तुतारी, राम मंदिर और खुशखबरी पर खुलकर की बात
कक्षा 9 की छात्रा ने बच्चे को दिया जन्म, नासिक के एक आश्रम स्कूल का सनसनीखेज मामला, मचा हड़कंप
मुंबई बचाते रह गए नासिक में हो गया खेल, ठाकरे गुट के 12 पार्षद बदल सकते हैं पाला, एकनाथ शिंदे ने चली एक और चाल
जेल में बच्चे को जन्म देना किसी भी महिला के लिए गरिमा की बात नहीं, निदा खान की बेल पर कोर्ट का तर्क
लगातार तीसरी घटना
कुछ दिन पहले सुरगाणा तालुका के शिंदे दिगर के आश्रम स्कूल की पांचवीं में पढ़ने वाली छात्रा ने आत्महत्या कर ली थी। उसने स्कूल के लोहे की रॉड से फांसी लगा ली थी। पिछले साल दिसंबर में हरसुल के दपास बोरीपाडा सरकारी आश्रम स्कूल में 9वीं में पढ़ने वाली छात्रा ने आत्महत्या कर ली थी। ये तीनों लड़की पढ़ने में तेज थी लेकिन परिस्थिति की वजह से इतनी कम उम्र में उन्होंने खुद को खत्म कर लिया।
आदिवासी भाग में भयानक स्थिति
नाशिक जिले के कई आदिवासी भाग की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। इन विद्यार्थियों का किसी तरह से आश्रम स्कूल में पढ़ाई चल रही थी। लेकिन कोरोना की वजह से ये आश्रम स्कूल बंद हो गए। उसके बाद ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हुई। आदिवासी भाग के गरीब लोगों के लिए मोबाइल खरीदना काफी मुश्किल है।
