Nashik Simhastha: कौन हैं शृंगेरी पीठ के शंकराचार्य विधुशेखर भारती? जानें उनका जीवन, शिक्षा और संन्यास यात्रा

Vidhushekhara Bharati Shankaracharya: श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य विधुशेखर भारती ज्ञान, तपस्या और अद्वैत वेदांत के विद्वान हैं। नासिक-त्र्यंबकेश्वर में कुंभ के धर्म ध्वजारोहण से उनकी भूमिका जुड़ी है।
Sringeri Shankaracharya Vidhushekhara Bharati Nashik Simhastha Kumbh
शंकराचार्य विधुशेखर भारती(फोटो नवभाारत)
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Highlights

  • विधुशेखर भारती का जन्म 24 जुलाई 1993 को तिरुपति में हुआ था।

  • पांच वर्ष की उम्र में उनका उपनयन संस्कार हुआ और वेदों का अध्ययन शुरू किया।

  • वर्ष 2009 में उन्होंने श्रृंगेरी शारदा पीठ में शास्त्रों की शिक्षा ली।

Nashik Simhastha Kumbh: श्रृंगेरी पीठ के वर्तमान शंकराचार्य पूज्य महा स्वामी विधु शेखर भारती जी ज्ञान, तपस्या और सरलता की साक्षात प्रतिमूर्ति हैं शृंगेरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी श्री विधुशेखर भारती जी महाराज का जीवन आधुनिक युग में इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि जो ज्ञान जप तपस्या और गुरु-कृपा से संचित होता है, तो वह लोक-कल्याण का माध्यम बन जाता है।

वे आदि गुरु शंकराचार्य के उस संदेश को जीवंत कर रहे हैं जो संपूर्ण मानवता को शांति और मुक्ति की राह दिखाता है। 24 जुलाई 1993 को पावन तीर्थ क्षेत्र तिरुपति (आंध्र प्रदेश) में एक परम आदरणीय वैदिक विद्वान ब्राह्मण परिवार में हुआ था। बाल्यावस्था से ही उनकी असाधारण कुशाग्र बुद्धि और वैराग्य के लक्षण दिखाई देने लगे थे।

मात्र 5 वर्ष की अल्पायु में उनका उपनयन संस्कार हुआ और उन्होंने अपने पिता एवं दादाजी के संरक्षण में कृष्ण यजुर्वेद का गहन अध्ययन शुरू किया, जिसमें उन्होंने बहुत कम समय में पूर्ण महारत (क्रम-पाठ तक) हासिल कर ली।

गुरु-चरणों में शास्त्रों की योग्यता

वर्ष 2009 में, धर्म के प्रति उनकी अगाध निष्ठा उन्हें श्रृंगेरी शारदा पीठ ले आई। वहां उन्होंने महान विद्वान और 36वें जगतगुरु श्री श्री भारती तीर्थ महासन्निधानम के चरणों में शरण ली। ब्रह्मचारी वेंकटेश्वर प्रसाद की प्रखर बुद्धि और आध्यात्मिक तड़प को देखकर गुरुदेव अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने स्वयं उन्हें शास्त्र-अध्ययन कराने का संकल्प लिया।

गुरुदेव के दिव्य मार्गदर्शन में उन्होंने निम्नलिखित शास्त्रों में अप्रतिम योग्यता प्राप्त की तर्क शास्त्र (Nyaya/Logic): न्याय और तर्क के कठिन सिद्धांतों का गूढ़ विश्लेषण। अद्वैत वेदांत (Advaita Vedanta): आदि शंकराचार्य के भाष्यों और उपनिषदों के परम ज्ञान की प्राप्ति। व्याकरण और मीमांसा: संस्कृत भाषा की शुद्धता और वैदिक ग्रंथों के सटीक अर्थों की गहरी समझ।

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सन्यास दीक्षा और जगतगुरु पद पर आरूढ़ होना

उनकी असाधारण विलक्षण, विरक्ति और अटूट गुरु-भक्ति को देखते हुए, जगतगुरु श्री भारती तीर्थ महास्वामीजी ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित किया। 23 जनवरी 2015 को उन्हें अत्यंत पवित्र सन्यास दीक्षा प्रदान की गई और उन्हें श्री विधुशेखर भारती का सन्यास नाम दिया गया।

बहुभाषी वक्ता और लोक कल्याण जगतगुरु श्री विधुशेखर भारती न केवल शास्त्रों के प्रकांड विद्वान हैं, बल्कि वे एक अद्भुत बहुभाषी वक्ता भी हैं। वे संस्कृत, हिंदी, कन्नड़, तेलुगु और तमिल भाषाओं में अत्यंत प्रभावपूर्ण और शास्त्रसम्मत आध्यात्मिक प्रवचन देते हैं। उनके सरल, मधुर और ज्ञानयुक्त वचनों से देश-विदेश के लाखों भक्त सनातन मार्ग की ओर प्रेरित हो रहे हैं।

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श्रृंगेरी पीठ के अंतर्गत त्रयंबकेश्वर तीर्थ क्षेत्र

यहां पर विशेष उल्लेखनीय तथ्य यह भी है कि आदि शंकराचार्य के द्वारा देश के चार कोनों में स्थापित पीठ में से श्रृंगेरी पीठ के अंतर्गत ही नासिक-त्रंबकेश्वर का तीर्थ क्षेत्र आता है जिसे दक्षिण पीठ भी कहा जा सकता है। और यही कारण है कि पूज्य महाराज श्री के श्री हाथों से त्रंबकेश्वर में कुंभ का धर्म ध्वजारोहण सनातन धर्म और नासिक सिंहस्थ कुंभ के इतिहास में सोडियम अक्षरों से अंकित होगा।