सिन्नर एमआईडीसी में तिहरा संकट: कामगारों की कमी, ईंधन की मार और ठप बुनियादी सुविधाओं से उद्योगपति बेहाल

Sinnar MIDC crisis: नासिक के सिन्नर औद्योगिक क्षेत्र में कामगारों की कमी, ईंधन की बढ़ती कीमतों और गुलवंच एमआईडीसी में बुनियादी सुविधाओं के अभाव से स्थानीय उद्योग भारी संकट में हैं।
Sinnar MIDC in Nashik faces a triple crisis due to severe labor shortages, rising fuel prices, and incomplete infrastructure projects in Gulvanch industrial area.
औद्योगिक क्षेत्र (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
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Nashik industrial News: राज्य में तेजी से विकसित हो रहे सिन्नर के औद्योगिक क्षेत्र के सामने वर्तमान में तिहरा संकट खड़ा हो गया है। कामगारों की भारी कमी, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें, ईंधन की किल्लत और गुलवंच एमआईडीसी में अपर्याप्त बुनियादी सुविधाएं इन सबने मिलकर स्थानीय उद्योगों को भारी परेशानी में डाल दिया है, जिससे उद्यमियों और उद्योगपतियों में तीव्र असंतोष है।

मुसलगांव, मालेगांव और गुलवंच एमआईडीसी परिसरों में जनशक्ति के अभाव में कई उद्योग अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहे हैं। ऑटोमोबाइल, पैकिंग, फैब्रिकेशन, वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स और निर्माण जैसे बड़े रोजगार वाले क्षेत्रों पर इसका सबसे ज्यादा और सीधा असर देखने को मिल रहा है। मजदूर छुट्टी में चले गए अपने गांव अप्रैल और मई के महीनों में शादियों का सीजन, खेती के काम और गर्मियों की छुट्टियों के कारण बड़ी संख्या में स्थानीय और परप्रांतीय (बाहरी राज्यों के) मजदूर अपने गांवों लौट गए हैं।

तैयार माल परिवहन का खर्च भी बढ़ गया

कामगारों की कमी के चलते कई कंपनियों को तीन शिफ्टों के बजाय केवल एक या दो शिफ्टों में ही उत्पादन जारी रखना पड़ रहा है। स्थिति इतनी गंभीर है कि कुछ कंपनियों में मालिकों और प्रबंधकों को खुद मशीनों पर उतरकर काम करना पड़ रहा है। पेट्रोल और डीजल के दामों में हुई भारी बढ़ोतरी ने उद्योगों के लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन खर्च को बहुत बढ़ा दिया है। कच्चा माल लाने और तैयार माल बाजार तक भेजने का खर्च बढ़ने से उत्पादन लागत (प्रोडक्शन कॉस्ट) बढ़ गई है।

इसके अलावा, बिजली कटौती के दौरान डीजल जनरेटर चलाने का खर्च भी अब फैवट्रियों के बजट से बाहर हो रहा है। गुलवंच एमआईडीसी में पानी की आपूर्ति और अन्य बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा लंबे समय से अधर में लटका हुआ है।

मालेगांव से गुलवंच तक एमआईडीसी की पानी की पाइप लाइन का काम दोनों तरफ से पूरा हो चुका है, लेकिन नासिक शहर में महज 200 मीटर पाइप लाइन का काम लंबित होने के कारण यह पूरा प्रोजेक्ट रुका पड़ा है, जिससे उद्यमी बेहद नाराज हैं। बढ़ती महंगाई और कामगारों की कमी के बीच बैंकों से समय पर लोन मंजूर न होने और लोन रिन्यूअल की पेचीदा प्रक्रियाओं के कारण नए निवेशक इस क्षेत्र में पूजी लगाने से कतरा रहे हैं।

संकट की घड़ी में सरकार करे मदद

  • पुराने उद्यमियों को भी बार-बार वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है।
  • 'सीमा' संगठन ने दो महीने पहले ही तहसीलदार और आपूर्ति विभाग से कामगारों के लिए कम दरों पर 5 किलो के गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने की मांग की थी, जिसे प्रशासन ने नजरअंदाज कर दिया।
  • अब उद्योग जगत ने सरकार से इस 'तिहरे संकट' में तुरंत हस्तक्षेप करने, कामगारों को वापस लाने के उपाय करने और निवेशकों को सुरक्षा व भरोसा देने की मांग की है।

अगर एमआईडीसी में कामगारों की कमी, ईंधन संकट और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर जल्द ही कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया, तो सिन्नर के उद्योगों को बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। - बबनराव वाजे, सह सचिव, 'सीमा' संगठन

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