Nashik Ring Road Project: किसानों का मंत्री झिरवाल के घर उग्र आंदोलन, भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर 8 जून तक रोक
Nashik Ring Road Project: नासिक रिंग रोड के भूमि अधिग्रहण के विरोध में किसानों ने मंत्री नरहरी झिरवाल के घर उग्र प्रदर्शन किया। आक्रोश को देखते हुए मंत्री ने 8 जून तक अधिग्रहण प्रक्रिया पर रोक लगाई।
- Written By: रूपम सिंह
नासिक रिंग रोड (सोर्स: सोशल मीडिया)
Nashik Ring Road Project Land Acquisition Protest: नासिक रिंग रोड परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के विरोध में प्रभावित किसानों ने मंगलवार को राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री नरहरी झिरवाल के निवास स्थान पर उग्र ‘अंतिम चेतावनी आंदोलन’ किया। आंदोलन के दौरान किसानों ने सरकार और संबंधित एजेंसियों पर भूमि अधिग्रहण के मामले में धोखाधड़ी करने तथा किसानों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
आंदोलन की सूचना मिलते ही मंत्री झिरवाल ने किसानों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं विस्तार से सुनीं। किसानों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए उन्होंने तत्काल राहत देते हुए 8 जून तक भूमि अधिग्रहण से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं पर रोक लगाने के निर्देश अधिकारियों को दिए। मंत्री के इस आश्वासन के बाद आंदोलन अस्थायी रूप से शांत हुआ, लेकिन किसानों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन और तेज किया जाएगा।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छावा क्रांतिवीर सेना के संस्थापक अध्यक्ष करण गायकर ने नासिक रिंग रोड परियोजना को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह परियोजना कुछ चुनिंदा बिल्डरों और सत्ता से जुड़े लोगों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार की गई है। उनके अनुसार रिंग रोड के किनारे विकसित होने वाले क्षेत्रों का फायदा निजी हितों के लिए उठाया जा रहा है, जबकि किसानों को उनकी जमीनों के उचित मूल्य से वंचित किया जा रहा है।
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गायकर ने यह भी आरोप लगाया कि महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल के कुछ अधिकारियों ने प्रस्तावित क्षेत्र में पहले से जमीनें खरीदी हैं और अब किसानों पर कम कीमतों पर जमीन बेचने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
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मंत्री का आश्वासन और अगली रणनीति
किसानों का कहना है कि प्रशासन की ओर से बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद उन्हें भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 19 और 21 के तहत नोटिस भेजे जा रहे हैं। किसानों ने इसे विश्वासघात बताते हुए कहा कि एक ओर बातचीत का आश्वासन दिया जाता है और दूसरी ओर अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
इस दौरान मंत्री नरहरी झिरवाल ने कहा कि वे स्वयं किसान परिवार से आते हैं और किसानों को झूठे आश्वासन नहीं देंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अधिकारियों की किसी भी प्रकार की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा किसानों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। मंत्री के आश्वासन के बाद अब किसानों की निगाहें 8 जून के बाद होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई और सरकार के अगले निर्णय पर टिकी हैं।
