JNPT connectivity project (सोर्सः सोशल मीडिया)
Nashik Freight Corridor: लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली कसारा-मनमाड तीसरी और चौथी रेलवे लाइन परियोजना नासिक सहित उत्तर महाराष्ट्र के आर्थिक विकास को नया आयाम देगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से न केवल क्षेत्र का बुनियादी ढांचा मजबूत होगा, बल्कि माल ढुलाई क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
यह रेल मार्ग क्षेत्र के प्रमुख आर्थिक केंद्रों को जोड़ने में मील का पत्थर साबित होगा, जिससे उद्योगों को कच्चा माल उपलब्ध कराने और तैयार माल को बाजार तक पहुंचाने में आसानी होगी। जवाहरलाल नेहरू पोर्ट प्राधिकरण (JNPT) और प्रस्तावित वधावन बंदरगाह से सीधा जुड़ाव होने के कारण कृषि उत्पादों के निर्यात को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।
लंबे समय से प्रतीक्षित कसारा-मनमाड के बीच तीसरी और चौथी लाइन को मंजूरी मिलने के बाद मध्य रेलवे के माध्यम से पूर्वी, मध्य और पश्चिमी भारत को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण मार्ग के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। रेलवे प्रशासन ने इस चुनौतीपूर्ण परियोजना को पांच वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
मनमाड से कसारा के बीच 131 किलोमीटर लंबा यह मार्ग ठाणे, नासिक और उत्तर महाराष्ट्र के लिए वरदान साबित होगा। इससे बंदरगाहों, ताप विद्युत केंद्रों, लॉजिस्टिक हब, ड्राई पोर्ट और औद्योगिक क्षेत्रों को तेज कनेक्टिविटी मिलेगी।
नासिक के एकलहरे स्थित ताप विद्युत परियोजना और जल्द शुरू होने वाली सिन्नर विद्युत परियोजना को इस रेल लाइन से बड़ी राहत मिलेगी। निफाड तालुका में प्रस्तावित ड्राई पोर्ट (शुष्क बंदरगाह) को भी सीधा लाभ होगा।
वर्तमान में नासिक का प्याज, अंगूर और सब्जियां मुंबई स्थित JNPT के माध्यम से विदेश निर्यात की जाती हैं। प्रस्तावित वधावन बंदरगाह से जुड़ने के लिए ‘वधावन बंदरगाह (तवा) से समृद्धि महामार्ग (भरवीर) फ्रेट कॉरिडोर’ को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। इगतपुरी से शुरू होने वाले इस तेज संचार एक्सप्रेसवे के जरिए नासिक को वधावन बंदरगाह से जोड़ा जाएगा, जहां इगतपुरी रेलवे स्टेशन एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित होगा।
रेल मंत्रालय के अनुसार, इस परियोजना से मनमाड-कसारा मार्ग पर प्रति वर्ष 46.1 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई संभव होगी। यह मार्ग मुंबई-हावड़ा के व्यस्त कॉरिडोर का हिस्सा है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर व्यापार को गति मिलेगी।
नई रेलवे लाइन बनने से इगतपुरी-कसारा घाट सेक्शन में ट्रेनों को अतिरिक्त इंजन (बैंकर) लगाने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे समय की बचत होगी और परिचालन अधिक सुगम बनेगा। रेलवे के अनुमान के अनुसार, इस सुधार से लॉजिस्टिक लागत में लगभग 127 करोड़ रुपये की बचत होगी। परिवहन सस्ता होने का सीधा लाभ व्यापारियों और उपभोक्ताओं को मिलेगा।
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परियोजना के निर्माण चरण और उसके बाद बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। अनुमान है कि इस प्रोजेक्ट से लगभग 89 लाख मानव-दिवस का रोजगार उत्पन्न होगा। कुल मिलाकर, यह परियोजना उत्तर महाराष्ट्र में बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने, कृषि निर्यात को बढ़ावा देने, उद्योगों को गति देने और रोजगार सृजन के माध्यम से समग्र विकास की नई दिशा तय करेगी।